
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को गति देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूती देने के लिए 250 करोड़ रुपये की लागत से जुड़ी 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ये प्रस्ताव राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी को भेजे गए हैं, जहां से स्वीकृति मिलने के बाद जल्द ही इन योजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों में कोल्ड स्टोरेज, फूड पार्क, डेयरी, प्रोसेसिंग यूनिट और एग्री-बेस्ड इंडस्ट्रीज स्थापित की जाएंगी। इसका सीधा लाभ किसानों, उद्यमियों और युवाओं को मिलेगा। इससे न केवल कृषि उपज को उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि खाद्य उत्पादों के संरक्षण और निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में 5,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिले। साथ ही, स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर दाम प्राप्त होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी सरकार लगातार ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ODOP)’ और ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना’ के तहत निवेश को बढ़ावा दे रही है। सरकार का मानना है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश से न केवल किसानों की स्थिति सुधरेगी, बल्कि राज्य को ‘फूड हब’ बनाने का लक्ष्य भी पूरा होगा।
इन 12 परियोजनाओं की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश का एक नया अध्याय शुरू होगा। उद्योग विभाग का कहना है कि एसएलईसी से स्वीकृति मिलते ही परियोजनाओं की नींव रखने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस कदम से राज्य में औद्योगिक विकास, किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण रोजगार सृजन को एक नई दिशा मिलेगी।
कुल मिलाकर, यूपी सरकार की यह पहल न केवल खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई ऊर्जा देगी, बल्कि यह “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी। by shruti kumar

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