
बिहार की राजनीति में अपने दबंग अंदाज़ और विवादों के लिए चर्चित पूर्व विधायक अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला किसी राजनीतिक टकराव का नहीं, बल्कि साइबर अपराध से जुड़ा है। मिली जानकारी के अनुसार, अनंत सिंह ने हाल ही में इस मामले में अदालत के समक्ष सरेंडर किया, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई।
दरअसल, पटना के एक साइबर थाने में दर्ज एक मुकदमे में अनंत सिंह पर ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री साझा करने और धमकी भरे संदेश भेजने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो उनके खिलाफ सबूत मिलने के बाद गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। हालांकि, अनंत सिंह ने खुद अदालत में पेश होकर आत्मसमर्पण किया और अपनी सफाई में कहा कि उनके खिलाफ यह राजनीतिक साजिश है।
अदालत में सुनवाई के दौरान उनके वकीलों ने दलील दी कि अनंत सिंह हमेशा कानून का सम्मान करते रहे हैं और वे जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिस सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट की गई सामग्री के आरोप हैं, वह अनंत सिंह का आधिकारिक अकाउंट नहीं है। वकीलों के तर्कों और केस की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी।
अनंत सिंह ने अदालत परिसर से बाहर निकलते हुए मीडिया से कहा कि वे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखते हैं और उन्हें सच्चाई सामने आने का इंतजार है। उन्होंने दावा किया कि वे इस तरह के झूठे मामलों से नहीं डरते, बल्कि हर बार की तरह इस बार भी साफ-सुथरे तरीके से लड़ाई लड़ेंगे।

गौरतलब है कि अनंत सिंह पहले भी कई बार विवादों में रहे हैं — चाहे वह हथियार बरामदगी का मामला हो या अपराधियों से संबंधों के आरोप। बावजूद इसके, वे अपने क्षेत्र में एक लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उनके समर्थकों ने जमानत मिलने के बाद अदालत परिसर में खुशी जताई और नारेबाजी भी की।
फिलहाल अदालत ने उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। साइबर थाने की टीम अब डिजिटल साक्ष्यों की जांच में जुटी है ताकि यह साफ हो सके कि अपराध में अनंत सिंह की सीधी भूमिका थी या नहीं।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि राजनीति और सोशल मीडिया के दौर में साइबर अपराध के नए रूप कितने खतरनाक हो चुके हैं। वहीं, अनंत सिंह का कहना है कि वे निर्दोष हैं और जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी।
बिहार की सियासत में यह प्रकरण एक नया मोड़ लाता है, क्योंकि अनंत सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के खिलाफ इस तरह के डिजिटल अपराध के आरोप पहले बहुत कम देखे गए हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाली जांच में न्यायालय के समक्ष कौन से नए तथ्य सामने आते हैं। by shruti kumari
