
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा में हैं — इस बार वजह है नोबेल शांति पुरस्कार 2025. कई लोगों को उम्मीद थी कि ट्रंप को यह सम्मान मिल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब नोबेल प्राइज समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि आखिर ट्रंप को यह पुरस्कार क्यों नहीं दिया गया.
समिति के अनुसार, नोबेल शांति पुरस्कार किसी व्यक्ति के प्रचार या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर नहीं दिया जाता, बल्कि उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने लंबे समय तक विश्व शांति, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय समझदारी को मजबूत करने में योगदान दिया हो. ट्रंप के कामों को इस कसौटी पर पर्याप्त नहीं पाया गया.

नोबेल समिति ने बताया कि “पुरस्कार का फैसला गहन समीक्षा और प्रमाणों पर आधारित होता है, न कि दावों या लोकप्रियता पर।” समिति ने यह भी कहा कि शांति प्रयासों को स्थायी और व्यापक प्रभाव वाला होना चाहिए, केवल अल्पकालिक या राजनीतिक कदम पर्याप्त नहीं हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल में कुछ कूटनीतिक प्रयास किए थे, जैसे कि मध्य पूर्व में अब्राहम समझौता (Abraham Accords), लेकिन उनकी कई नीतियां और बयानों ने वैश्विक विभाजन और तनाव को भी बढ़ाया. यही वजह रही कि उन्हें शांति पुरस्कार की सूची में शामिल नहीं किया गया.
नोबेल समिति के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज है. कुछ लोग ट्रंप के समर्थन में हैं, जबकि अन्य का कहना है कि शांति का अर्थ सिर्फ युद्ध न रोकना नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, संवाद और स्थायी सौहार्द को बढ़ावा देना है — और यही मानदंड ट्रंप पूरी तरह पूरा नहीं कर पाए.
फिलहाल, नोबेल शांति पुरस्कार 2025 किसी और को भले मिल गया हो, लेकिन डोनल्ड ट्रंप का नाम एक बार फिर वैश्विक चर्चा का हिस्सा जरूर बन गया है. BY SHRUTI KUMARI
