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IRCTC घोटाला: लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर आरोप तय, कोर्ट ने बताया पद का दुरुपयोग

आईआरसीटीसी घोटाला मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने हाल ही में एक अहम आदेश पारित करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए कहा कि अब इस मामले में औपचारिक रूप से मुकदमा चलेगा।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने फैसले में बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया, टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया तथा टेंडर प्राप्त करने की शर्तों में हेराफेरी की गई। कोर्ट के अनुसार, लालू यादव ने कोचर बंधुओं से जमीन के टुकड़े सस्ती दरों पर खरीदने की साजिश रची और फिर इन जमीनों को राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम प्रभावी नियंत्रण में लाने के लिए अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश की।

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और उनके साथ अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) तथा 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा चलेगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2) के तहत भी आरोप तय किए गए हैं। धारा 13(2) के अनुसार, यदि कोई लोक सेवक आपराधिक कदाचार में लिप्त पाया जाता है तो उसे न्यूनतम एक वर्ष और अधिकतम सात वर्ष की सजा हो सकती है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

यह मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव देश के रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के दो होटलों—BNR होटल (रांची, झारखंड) और पुरी होटल (ओडिशा)—के रखरखाव और सुधार के ठेकों के आवंटन में अनियमितताएं की गईं। सीबीआई के मुताबिक, लालू प्रसाद ने इन ठेकों को अनुचित तरीके से अपनी पत्नी राबड़ी देवी की कंपनी ‘सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड’ को दिलवाया और इसके बदले पारिवारिक लाभ लिया गया। इन ठेकों के वितरण में पारदर्शिता की कमी, पक्षपात और नियमों की अनदेखी के आरोप हैं।

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