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क्या आप जानते हैं? जयपुर का राजपरिवार दिवाली पर क्यों पहनता है काले कपड़े

दिवाली के दिन आमतौर पर लोग रंग-बिरंगे, चमकदार और नए कपड़े पहनते हैं। हर घर में रोशनी, उत्सव और सजावट का माहौल होता है। लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर का राजपरिवार इस परंपरा से बिल्कुल अलग है। हर साल दिवाली के दिन यह राजघराना काले वस्त्र धारण करता है — जो बाकी देश की परंपराओं से बिल्कुल विपरीत दिखता है। यह परंपरा कोई फैशन या आधुनिक ट्रेंड नहीं, बल्कि सदियों पुरानी राजवंशीय परंपरा और ऐतिहासिक घटना से जुड़ी हुई है।

इतिहास से जुड़ी यह अनोखी परंपरा

जयपुर का राजपरिवार दिवाली के दिन काले कपड़े इसलिए पहनता है क्योंकि इस दिन का रिश्ता उनके इतिहास के एक दुखद प्रसंग से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि जयपुर रियासत के महाराजा सवाई जगत सिंह द्वितीय के शासनकाल में दिवाली के दिन एक भयानक हादसा हुआ था। राजमहल में आतिशबाज़ी के दौरान आग लग गई, जिससे कई सैनिकों और सेवकों की मृत्यु हो गई। यह घटना महाराजा और पूरे राजपरिवार के लिए गहरा आघात लेकर आई।

उस दिन की स्मृति में महाराजा ने निर्णय लिया कि आगे से दिवाली के दिन राजपरिवार शोक स्वरूप काले वस्त्र धारण करेगा, ताकि उस दुखद घटना की याद हमेशा बनी रहे। तब से लेकर आज तक, यह परंपरा बिना टूटे चली आ रही है।
दिवाली पर शोक और श्रद्धा का प्रतीक

भले ही बाहर आम जनता दीपों की रौशनी में उत्सव मना रही होती है, लेकिन जयपुर राजमहल के भीतर दिवाली एक अलग ही रूप में मनाई जाती है। यहां हर्ष और शोक दोनों का संगम दिखता है।
राजपरिवार के सदस्य काले वस्त्र पहनते हैं, किंतु मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा पूरे विधि-विधान से करते हैं। आतिशबाज़ी और दीपदान तो होता है, लेकिन उस दिन का वातावरण गंभीर और श्रद्धाभाव से भरा रहता है। यह परंपरा इस बात की प्रतीक है कि हर रोशनी के पीछे एक अंधकार की कहानी भी होती है।

काले रंग का अर्थ क्या है?

भारतीय संस्कृति में काला रंग अक्सर नकारात्मक माना जाता है, लेकिन जयपुर राजपरिवार के लिए यह स्मृति, सम्मान और आत्मबल का प्रतीक है। काला वस्त्र पहनकर वे अपने पूर्वजों की याद को जीवित रखते हैं और यह संदेश देते हैं कि समृद्धि और शक्ति के बीच भी बीते दुखों को याद रखना जरूरी है।

परंपरा जो अब भी जारी है

आज भी जब जयपुर सिटी पैलेस में दिवाली मनाई जाती है, तो महाराजा पद्मनाभ सिंह और उनका परिवार काले वस्त्र पहनकर पूजा करते हैं। महल को दीपों से सजाया जाता है, लेकिन परिवार के लिए यह दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि श्रद्धांजलि का भी दिन है।
एक अनोखा संदेश

जयपुर राजपरिवार की यह परंपरा हमें सिखाती है कि हर त्योहार का मतलब केवल खुशी मनाना नहीं होता, बल्कि अपने इतिहास, संस्कार और स्मृतियों को भी संजोना होता है।
काले कपड़े पहनने की यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि जीवन में रोशनी तभी मायने रखती है जब हम अपने अंधकार को स्वीकार करें। b y shruti kumari

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