
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की उम्मीदवार सीमा सिंह का मढ़ौरा सीट (सारण जिला) से नामांकन रद्द कर दिया गया है। चुनाव आयोग की जांच में उनके नामांकन पत्र में कई तकनीकी खामियां पाई गईं, जिसके चलते रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका पर्चा अमान्य घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, मढ़ौरा सीट से एलजेपी (रामविलास) की प्रत्याशी सीमा सिंह ने कुछ दिन पहले नामांकन दाखिल किया था। जब चुनाव अधिकारी ने सभी उम्मीदवारों के पर्चों की जांच की, तो सीमा सिंह के दस्तावेजों में कुछ आवश्यक कागजात अधूरे पाए गए। इसमें हलफनामा और कुछ जरूरी हस्ताक्षर संबंधी त्रुटियां बताई जा रही हैं। इसी वजह से निर्वाचन अधिकारी ने सीमा सिंह सहित तीन अन्य उम्मीदवारों के नामांकन को रद्द कर दिया।

एलजेपी (रामविलास) पहले ही एनडीए गठबंधन में सीटों को लेकर जद्दोजहद झेल रही है। अब एक प्रमुख उम्मीदवार का पर्चा रद्द होना पार्टी के लिए एक और राजनीतिक झटका है। मढ़ौरा सीट सियासी रूप से अहम मानी जाती है और यहां से एलजेपी (रामविलास) के उतरने से पार्टी को उम्मीद थी कि वह गठबंधन में अपनी स्थिति मजबूत करेगी। लेकिन अब यह सीट पार्टी के हाथ से फिसलती दिख रही है। सीमा सिंह के नामांकन रद्द होने के बाद राजद (RJD) और जदयू (JDU) जैसी विपक्षी पार्टियों के लिए यह एक बड़ा मौका बन गया है। अब मैदान में कम उम्मीदवार होने से वोटों का बिखराव भी कम होगा, जिससे मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टियों को सीधा लाभ मिल सकता है।

खबर है कि सीमा सिंह और उनकी पार्टी इस फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रही हैं। एलजेपी (रामविलास) का दावा है कि सभी कागजात नियमानुसार भरे गए थे और यह केवल तकनीकी त्रुटि के आधार पर रद्द किया गया है। अब देखना होगा कि क्या चुनाव आयोग दोबारा इस पर कोई राहत देता है या नहीं। मढ़ौरा सीट पर यह घटनाक्रम पूरे बिहार चुनाव में चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रद्दीकरण से न केवल एलजेपी (रामविलास) की साख पर असर पड़ेगा बल्कि एनडीए की सीटों के समीकरण पर भी इसका असर दिख सकता है।