
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है। यहां मुस्लिम समाज के लोगों ने हिंदू संत प्रेमानंद महाराज के जल्द ठीक होने के लिए दरगाह पर जाकर दुआ मांगी। यह नजारा देखकर हर किसी ने कहा कि यही असली भारत है, जहां धर्म से ऊपर इंसानियत को रखा जाता है। बताया गया कि बैतूल के कई मुस्लिम युवा दरगाह पर पहुंचे। उनके हाथों में प्रेमानंद महाराज की तस्वीरें थीं। सबने मिलकर चादर चढ़ाई और फूल अर्पित किए। उन्होंने खुदा से दुआ की कि महाराज जल्द स्वस्थ हों और लंबी उम्र पाएं। वहां मौजूद लोगों ने कहा कि यह दृश्य वाकई भावनात्मक था और समाज में एकता का संदेश दे गया।
दरगाह पर पहुंचे युवाओं में शेख सलीम और शरीक खान नाम के युवक भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि “हम सब एक हैं, इंसानियत सबसे बड़ी चीज है। जब कोई बीमार होता है, तो धर्म नहीं देखा जाता, बल्कि उसकी सेहत की फिक्र की जाती है। प्रेमानंद महाराज सभी धर्मों में आदर के पात्र हैं, इसलिए हमने उनके लिए दुआ की।” प्रेमानंद महाराज पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे हैं। बताया गया कि उन्हें किडनी से जुड़ी बीमारी है और उनका इलाज चल रहा है। उनके अनुयायी देशभर में उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार उनके लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं।

बैतूल में हुई यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि भारत की असली पहचान इसकी एकता और भाईचारे में है। जब एक समुदाय दूसरे समुदाय के धर्मगुरु के लिए दुआ करता है, तो यह एक सुंदर संदेश देता है कि इंसानियत हर धर्म से बड़ी होती है। यह देश वही है, जहां मंदिरों में अजान की गूंज और मस्जिदों में आरती की आवाज सुनाई देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं समाज को जोड़ने का काम करती हैं। आज के समय में जब नफरत और मतभेद की बातें बढ़ रही हैं, तब बैतूल की यह तस्वीर उम्मीद और सद्भाव का प्रतीक बन गई है। यह एक याद दिलाने वाली मिसाल है कि एक-दूसरे की भलाई के लिए हाथ उठाना ही सच्ची पूजा और इबादत है। अंत में कहा जा सकता है कि बैतूल की यह खबर पूरे देश के लिए एक सबक है। धर्म चाहे कोई भी हो, अगर इंसानियत जिंदा है, तो समाज कभी नहीं टूटेगा। मुस्लिम समाज द्वारा दरगाह पर प्रेमानंद महाराज के लिए की गई दुआ ने यह साबित कर दिया कि भारत की आत्मा अब भी प्रेम, शांति और भाईचारे में बसती है।