
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव फिर बढ़ गया है। हाल ही में अफगानिस्तान की गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन कानी ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने कदाचार या सीमा उल्लंघन जारी रखा, तो अफगानिस्तान ऐसा जवाब देगा “जो बाकी के लिए सबक बनेगा।” कानी ने विशेष रूप से कहा है कि अफगानिस्तान के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन उस पर कभी किसी के आगे झुकने की बात नहीं हुई। उन्होंने कहा, “आपके पास भी अब हथियार हैं, कम या ज्यादा। लेकिन आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि अफगानिस्तान के लोग किसी के सामने कभी झुके नहीं।”
इस बयान का समय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दो देशों के बीच वार्ता भी असफल रही है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में सक्रिय तहरीक‑ए‑तालिबान पाकिस्तान (TTP) के कैंपों पर हवाई हमले किए थे, जिसके बाद 19 अक्टूबर को कतर में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने तुरंत सीजफायर लगाने और तनाव कम करने की कोशिश की थी। लेकिन उसके बाद 25-28 अक्टूबर को इस्तांबुल में हुई चार-दिन की दूसरी दौर की वार्ता पूर्णतः विफल रही। बातचीत टूटने का कारण मुख्य रूप से दोनों पक्षों के बीच गहरा अविश्वास और असहमति रही है। पाकिस्तान ने अफगान सरकार से लिखा गया गारंटी देने, TTP के कैंप खत्म करने और उन पर कार्रवाई करने की मांग की थी, जिसे अफगान पक्ष ने “संभव नहीं” बताते हुए नकार दिया।

इस असफल वार्ता के परिणामस्वरूप अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा, विशेष रूप से दराँद‑लाइन (Durand Line) क्षेत्र में सैन्य टकराव का खतरा बढ़ गया है। अफगानिस्तान की चेतावनी साफ है: “हम जवाब देंगे, और वो फैसला पाकिस्तान के लिए सबक बनेगा।” विश्लेषक यह भी कह रहे हैं कि इस तरह की भाषा से यह संकेत मिल रहा है कि अफगानिस्तान अपनी सीमाओं, विशेषकर पाकिस्तानी पक्ष की गतिविधियों के खिलाफ, अब और अधिक सख्त रवैया अपनाने वाला है। हालांकि इस चेतावनी का वास्तविक अर्थ यह भी हो सकता है कि अफगानिस्तान यह बताना चाहता है कि वो पाकिस्तानी दखलंदाजियाँ या घुसपैठ बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान की ओर से अभी तक इस चेतावनी पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस पटल पर राजनय-सैन्य गतिरोध गहराता जा रहा है। आगे यह देखा जाना है कि दोनों देशों में प्रस्तावित वार्ता कैसे आगे बढ़ती है, और क्या इस चेतावनी का असर सीमा-स्थल पर सामने आएगा।