
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बिहार के मुज़फ़्फरपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए बिहार की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों की महत्ता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान सिर्फ राजनीति से नहीं, बल्कि यहाँ की मिट्टी, मेहनत और लोककला से है। मोदी ने अपने भाषण में ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बिहार की लीची, लहठी और सुजनी जैसी पारंपरिक वस्तुएँ भारत की शान हैं और इनका प्रचार-प्रसार ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ की असली ताकत है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “मुज़फ़्फरपुर की लीची जितनी मीठी है, उतनी ही मीठी यहाँ की बोली भी है। जिस मिट्टी में इतनी मिठास है, वहाँ का हर उत्पाद देशभर में प्रसिद्ध होना चाहिए। लीची, लहठी और सुजनी न केवल बिहार की संस्कृति का प्रतीक हैं, बल्कि ये भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता के मजबूत स्तंभ बन सकते हैं।” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों को अपनाएँ, उन्हें बढ़ावा दें और “स्थानीय को वैश्विक” बनाने में योगदान दें।
मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने “वोकल फॉर लोकल” को एक जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया है, ताकि देश का हर नागरिक अपने क्षेत्र के पारंपरिक उत्पादों को पहचान दे सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार की “सुजनी कढ़ाई” विश्वस्तरीय है, जिसे महिला शिल्पकार पीढ़ियों से संवारती आई हैं। इसी तरह, “लहठी” — जो विवाह और शुभ अवसरों पर इस्तेमाल की जाती है बिहार की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने के लिए सरकार “वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट” जैसी योजनाओं के तहत विशेष सहायता दे रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि आज जब दुनिया ‘हैंडमेड’ और ‘सस्टेनेबल’ वस्तुओं की ओर लौट रही है, तब भारत के पास अपनी पारंपरिक कला और उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का स्वर्ण अवसर है। उन्होंने कहा, “हमारे शिल्पकार, कारीगर और छोटे व्यापारी ही देश की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं। जब हम उनसे खरीदी करते हैं, तो सिर्फ एक उत्पाद नहीं लेते, बल्कि उनके परिश्रम, परंपरा और सम्मान को भी बढ़ाते हैं।”

अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने जोश से नारा लगाया — “फिर एक बार, NDA सरकार!” — और जनता से अपील की कि वे विकास, आत्मनिर्भरता और गौरव के इस अभियान में NDA का साथ दें।
मुज़फ़्फरपुर की जनसभा में पीएम मोदी का यह संबोधन न केवल राजनीतिक संदेश था, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को जमीनी हकीकत से जोड़ने का प्रयास भी। उन्होंने बिहार की धरती से पूरे देश को यह संदेश दिया कि आत्मनिर्भर भारत का रास्ता अपने गाँव, अपनी परंपरा और अपने उत्पादों से होकर ही गुजरता है।
