
भारत की बेटियों का परचम एक बार फिर क्रिकेट के मैदान पर लहराया है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रचते हुए सात बार की विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को धूल चटा दी और आईसीसी महिला वनडे विश्व कप 2025 के फाइनल में अपना स्थान पक्का कर लिया। सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हराकर शानदार जीत दर्ज की। यह दृश्य पूरे देश के दिलों को छू गया क्योंकि यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी थी।

संघर्ष की कहानी
हरमनप्रीत कौर का क्रिकेट सफर आसान नहीं रहा है। पंजाब के मोगा जैसे छोटे शहर से निकलकर विश्व क्रिकेट की सबसे बड़ी कप्तानों में गिनी जाने वाली हरमनप्रीत ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए तमाम मुश्किलों का सामना किया। बचपन में क्रिकेट खेलने के लिए उन्होंने लड़कों के बीच अभ्यास किया, समाज की रूढ़ियों से लड़ीं, और हर मैच में अपनी पहचान बनाई।
इससे पहले भी उन्होंने कई बार भारत को जीत की दहलीज तक पहुंचाया, लेकिन किस्मत साथ नहीं दी। 2017 के वर्ल्ड कप फाइनल की हार आज भी उनके दिल में चुभती है। शायद इसी कारण जब टीम ने इस बार ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को हराकर फाइनल में प्रवेश किया, तो हरमनप्रीत के आंसू बरस पड़े वो आंसू थे सपनों के पूरे होने के।
बेटियों की जीत, देश का गर्व
इस जीत ने यह साबित कर दिया कि भारतीय बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। जेमिमा रॉड्रिग्स, स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा जैसी खिलाड़ी आज करोड़ों युवतियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
हरमनप्रीत ने मैच के बाद कहा “हम सबने इस पल के लिए बहुत मेहनत की है। ये जीत सिर्फ हमारी नहीं, हर उस लड़की की है जिसने क्रिकेट खेलने का सपना देखा है।”
आगे का सफर
अब भारत फाइनल में इंग्लैंड का सामना करेगा। टीम का आत्मविश्वास अपने चरम पर है और हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में खिलाड़ी जोश से भरे हैं। पूरा देश उम्मीद कर रहा है कि यह बार भारतीय महिलाएं विश्व कप अपने नाम करेंगी। हरमनप्रीत कौर के आंसू सिर्फ खुशी के नहीं थे, वो उन सभी संघर्षों, उम्मीदों और सपनों की कहानी थे जो उन्होंने अपने सीने में सालों तक संजोए रखे। जब एक कप्तान मैदान पर रोती है, तो वो कमजोरी नहीं, बल्कि जीत की असली ताकत होती है। आज हरमनप्रीत और उनकी टीम ने दिखा दिया “बेटियां जब ठान लें, तो इतिहास लिख देती हैं। by shruti kumari
