
बिहार में विधानसभा चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है। एक ओर महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव अपने “तेजस्वी प्रण” के जरिए युवाओं, किसानों और गरीबों को नई उम्मीदें दिखा रहे हैं, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए अपने “संकल्प पत्र” के साथ विकास और सुशासन के नए वादे कर रहे हैं। दोनों घोषणाओं में कई समानताएं हैं, लेकिन दिशा और प्राथमिकता में बड़ा फर्क साफ दिखता है।
तेजस्वी का “तेजस्वी प्रण” युवाओं पर केंद्रित वादे
तेजस्वी यादव ने अपने घोषणापत्र को “तेजस्वी प्रण” नाम दिया है। यह पूरी तरह से युवा, रोजगार और सामाजिक न्याय पर केंद्रित है।
मुख्य वादों में शामिल हैं –
- 10 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा।
- शिक्षा और स्वास्थ्य में सरकारी निवेश बढ़ाने की बात।
- कृषि ऋण माफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की गारंटी।
- महिलाओं की सुरक्षा और आरक्षण में सुधार की योजना।
- आवास, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को हर घर तक पहुंचाने का वादा।
तेजस्वी के घोषणापत्र की भाषा युवाओं के सपनों और असंतोष दोनों को साधने की कोशिश करती है। वे बार-बार “बेरोजगारी हटाओ, सम्मान बढ़ाओ” का नारा दोहराते हैं।

NDA का “संकल्प पत्र” – विकास और स्थिरता की दिशा में
वहीं एनडीए का “संकल्प पत्र” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पारंपरिक विकास राजनीति को आगे बढ़ाता है। इसमें सुव्यवस्थित शासन, उद्योग, कृषि और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया गया है।
मुख्य घोषणाएं हैं –
- बिहार को अगले 5 साल में देश के टॉप-10 विकसित राज्यों में शामिल करना।
- हर युवा को रोजगार या स्वरोजगार के अवसर।
- हर जिले में स्पोर्ट्स सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना।
- प्रमुख धार्मिक स्थलों का विकास और टूरिज्म को बढ़ावा।
- कृषि और ग्रामीण उद्योग को नई तकनीक से जोड़ना।
- महिला उद्यमियों के लिए विशेष ऋण और सहायता योजनाएं।
एनडीए का फोकस प्रशासनिक स्थिरता और बुनियादी ढांचे के विकास पर है।