रिपोर्ट-अन्नू दिवाकर

यूपी के कानपुर देहात में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां घरेलू विवाद के चलते एक पिता ने अपने ही इकलौते बेटे की जान ले ली। बताया जा रहा है कि दुर्गा प्रसाद दीक्षित और उनके 24 वर्षीय बेटे आयुष के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था। आए दिन दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा हो जाता था, जिससे घर का माहौल लगातार खराब बना हुआ था।
गुरुवार की रात भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई। परिवार वालों ने किसी तरह मामला शांत करवाया और दोनों अपने-अपने कमरों में चले गए। लेकिन ये खामोशी ज्यादा देर नहीं चली। सुबह भोर पहर करीब तीन बजे फिर से दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। गुस्से में दुर्गा प्रसाद बेटे को मारने के लिए दौड़े, तो आयुष डरकर अपने कमरे में बंद हो गया। घर का तनाव बढ़ता जा रहा था, और कोई भी हालात काबू में नहीं कर पा रहा था।

काफी देर बाद आयुष कमरे से बाहर निकला तो स्थिति एकदम बिगड़ गई। गुस्से में तमतमाए दुर्गा प्रसाद ने अपनी लाइसेंसी बंदूक उठाई और बेटे पर ताबड़तोड़ दो गोलियां दाग दीं। एक गोली आयुष के सीने में और दूसरी उसके पेट में लगी। गोलियों की आवाज से पूरा घर सहम गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आयुष कुछ ही मिनटों में तड़प-तड़पकर दम तोड़ गया।
अपने बेटे को गोली मारने के बाद दुर्गा प्रसाद की समझ जैसे ठिकाने आ गई। उन्होंने कोई भागने की कोशिश नहीं की, बल्कि सीधे थाने जाकर बंदूक समेत खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। पत्नी आशा देवी की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह घटना बताती है कि घरेलू कलह और गुस्से का असर कितना भयानक हो सकता है। एक छोटी सी बहस पूरे परिवार की जिंदगी बदल देती है और एक मासूम जान हमेशा के लिए खो जाती है।
कानपुर देहात की इस घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। हत्या की सूचना मिलते ही सीओ डेरापुर राजीव सिरोही, इंस्पेक्टर संजेश सिंह और चौकी प्रभारी गिरीश चंद्र टीम के साथ मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए। शुरुआती जांच में पता चला कि आयुष अपने पिता दुर्गा प्रसाद से मोबाइल के लिए पैसे मांग रहा था। इसी बात को लेकर दोनों में लंबे समय से विवाद चलता आ रहा था। घर में रोज झगड़े की स्थिति बनी रहती थी।
घटना से पहले शाम को दुर्गा ने पत्नी की पिटाई की थी, जिस पर बेटे ने विरोध किया। रात में मां-बेटे ने घर में खाना न बनने पर दुकान से समोसे लाकर खाए। लेकिन तनाव कम नहीं हुआ। भोर करीब 3 बजे फिर झगड़ा शुरू हुआ। पिता को गुस्से में देखकर आयुष शौचालय में छिप गया और मां ने बाहर का दरवाजा बंद कर दिया। जैसे ही वह बाहर निकला, दुर्गा प्रसाद ने लाइसेंसी बंदूक से उस पर दो गोलियां दाग दीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपी सीधा थाने जाकर सरेंडर कर आया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर सख्त कदम उठाती तो शायद आयुष की जान बच सकती थी। दुर्गा का स्वभाव पहले से ही सनकी था और इसी सनक ने पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया।