
सर्दियों का मौसम जैसे-जैसे दस्तक देता है, रसोई में चटपटी और गर्मागरम डिशेज़ की खुशबू भी बढ़ने लगती है। ऐसे में अगर बात मटर से बनी कचौड़ी की हो, तो कहना ही क्या! हरी मटर का मीठा-तीखा स्वाद और खस्ता कचौड़ी का मेल ऐसा है कि बस एक बार खा लें, फिर गिनती से ज्यादा कचौरियों का मज़ा लेने लगते हैं। मटर कचौड़ी न सिर्फ नाश्ते में बल्कि शाम की चाय के साथ भी परफेक्ट लगती है। आइए जानते हैं इस सर्दी ट्राई करने लायक इसकी खास रेसिपी, कुछ उपयोगी टिप्स के साथ।
मटर कचौड़ी की कहानी और स्वाद का रहस्य
टर कचौड़ी उत्तर भारत की एक बेहद लोकप्रिय डिश है, खासकर सर्दियों में यह हर घर में खास पहचान बना लेती है। ताज़ी हरी मटर में मसालों का तड़का लगाकर जो भरावन तैयार होता है, वही इस कचौड़ी का असली स्वाद बढ़ाता है। जब खस्ता कचौड़ी में यह भरावन भरकर गर्म तेल में छोड़ा जाता है, तो इसकी खुशबू ही भूख बढ़ाने के लिए काफी होती है। यही कारण है कि एक बार खाने पर लोग गिनती छोड़कर स्वाद में खो जाते हैं।

मटर कचौड़ी बनाने की सामग्री
आटा तैयार करने के लिए
मैदा – 2 कप
सूजी – 2 बड़े चम्मच
तेल या घी – 3 बड़े चम्मच
नमक – स्वादानुसार
पानी – आवश्यकतानुसार
भरावन के लिए—
हरी मटर – 1 कप (दरदरी पिसी या मसलकर)
हरी मिर्च – 2 बारीक कटी
अदरक – 1 छोटा चम्मच कद्दूकस
धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच
जीरा – ½ छोटा चम्मच
गरम मसाला – ½ छोटा चम्मच
लाल मिर्च पाउडर – ½ छोटा चम्मच
अमचूर – ½ छोटा चम्मच
नमक – स्वादानुसार
तेल – 1 बड़ा चम्मच (तड़के के लिए)
रेसिपी बनाने की विधि
- आटा तैयार करें
एक बड़े बर्तन में मैदा, सूजी, नमक और घी/तेल डालें। इसे अच्छी तरह मिलाकर मुठी में दबाएं, यदि यह बंध जाए तो आटा सही है। अब पानी की मदद से सख्त और स्मूथ आटा गूंथ लें। इसे 15–20 मिनट ढककर रख दें। - मटर का भरावन तैयार करें
कढ़ाई में तेल गरम करें। इसमें जीरा डालें और चटकने दें। अब हरी मिर्च और अदरक डालकर भूनें। इसके बाद पीसी हुई मटर डालें। मसाले जैसे धनिया पाउडर, लाल मिर्च, अमचूर और नमक डालकर मध्यम आंच पर 7–8 मिनट तक चलाते हुए भूनें। जब मिश्रण सूखा और सुगंधित हो जाए, तो इसे ठंडा होने दें। - कचौड़ी बेलें और तैयार करें
आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं। एक लोई को हल्का बेलें, बीच में भरावन रखें और चारों तरफ से उठाकर बंद कर दें। अब इसे हल्का-सा बेलें—ना ज्यादा पतला, ना ज्यादा मोटा। - कचौड़ी तलें
कढ़ाई में तेल गरम करें। कम-मीडियम आंच पर कचौरियों को सूजन आने तक और सुनहरा होने तक तलें। तेज आंच पर तलने से कचौड़ी फूलेगी नहीं, इसलिए आंच नियंत्रित रखें।
