
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तैनात जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे को लेकर इन दिनों बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वजह यह है कि उन्होंने इस्तीफा देने की घोषणा तो कर दी, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में अब तक उनका कोई लिखित इस्तीफा नहीं पहुँचा है। इसी कारण यह मामला चर्चा में आ गया है। दरअसल, 27 जनवरी 2026 को प्रशांत सिंह का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे भावुक होकर रोते नजर आए। इस वीडियो में उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपमान को बर्दाश्त नहीं कर सकते, इसलिए वे अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वे उस सरकार का “नमक खाते हैं” और ऐसे में चुप रहना उनके लिए संभव नहीं है।
हालांकि, जब शासन स्तर पर इसकी जांच हुई तो पता चला कि उनका इस्तीफा अभी तक न तो राज्य कर आयुक्त कार्यालय और न ही सरकार के पास पहुँचा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक कोई अधिकारी लिखित रूप में इस्तीफा नहीं देता, तब तक उसे आधिकारिक इस्तीफा नहीं माना जा सकता। इसी वजह से सरकार ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। इस बीच मामला और गंभीर तब हो गया, जब प्रशांत सिंह के सगे भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। भाई का दावा है कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की थी। आरोप है कि उन्होंने खुद को 40 प्रतिशत नेत्रहीन दिखाकर आरक्षण का लाभ लिया। यह शिकायत साल 2021 से विभाग में लंबित बताई जा रही है और इसकी जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अब यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस्तीफे की घोषणा और दिव्यांगता प्रमाणपत्र से जुड़ा मामला आपस में जुड़े तो नहीं हैं। क्योंकि इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद यह पुराना मामला फिर से चर्चा में आ गया है। इसके अलावा प्रशांत सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी सामने आई है। वे पहले दिवंगत नेता अमर सिंह की पार्टी लोकमंच से जुड़े रहे हैं और एक समय बीजेपी से टिकट मिलने की चर्चा भी रही थी। इसी कारण कुछ लोग इसे सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक मामला भी मान रहे हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि प्रशांत सिंह तकनीकी रूप से अभी भी पद पर बने हुए हैं, क्योंकि उनका इस्तीफा लिखित रूप में स्वीकार नहीं हुआ है। सरकार अब रिपोर्ट के आधार पर तय करेगी कि आगे क्या कार्रवाई की जाए। यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।