
दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसमें एक बाइक सवार युवक की खुले गड्ढे में गिरकर मौत हो गई। यह हादसा 5 फरवरी देर रात हुआ, जब कमल नाम का युवक अपने रोहिणी स्थित कार्यालय से घर लौट रहा था। परिवार के अनुसार, वह रात लगभग 12:30 बजे अंतिम बार बातचीत में कहा था कि वह 10 मिनट में घर पहुंच जाएगा, लेकिन इसके बाद वह किसी से संपर्क नहीं कर पाया। सुबह तक जब वह वापस नहीं आया, तब परिजन उसकी खोजबीन करने लगे और कई थाना व अस्पताल जाकर तलाश की, लेकिन कोई सूचना नहीं मिली। अंत में पुलिस को सूचना मिलने पर 7:30 बजे तक उसके शव को गड्ढे के अंदर और बाइक उसके पास मिली।
कमल कथित तौर पर जल बोर्ड की ओर से खोदे गए गड्ढे में गिर गया, जिसमें पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने की आशंका जताई जा रही है। मृतक के भाई और दोस्तों ने पुलिस और अधिकारियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पुलिस से मदद मांगी, तो पुलिस ने उन्हें केवल अंतिम लोकेशन बता दी और खुद खोज करने को कहा, जिससे उन्हें रात भर कठिनाई उठानी पड़ी। परिजन यह भी आरोप लगा रहे हैं कि अगर मौके पर समय पर कार्रवाई होती तो यह मौत टाली जा सकती थी।

घटना के बाद दिल्ली जल बोर्ड और सरकार ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी है। इस समिति को साइट की सुरक्षा व्यवस्थाओं, गड्ढे के आसपास चेतावनी संकेत, बैरिकेड और अन्य सुरक्षा उपायों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। जांच समिति शाम तक अपनी रिपोर्ट सौंपने की बात कर रही है और अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले पर प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया है और सवाल उठाया है कि क्यों सड़क और निर्माण क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। इससे यह मुद्दा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी की बहस का विषय बन गया है।