
भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ लंबे समय से चले आ रहे सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को सस्पेंड (निलंबित) करने के बाद अब जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर 1,856 मेगावाट क्षमता वाले सावलकोट हाइड्रो-इलेक्ट्रीक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा दिया है। इस योजना का उद्देश्य देश की ऊर्जा क्षमता को बढ़ाना और नदी के पानी के उपयोग को अधिकतम करना है। सावलकोट परियोजना को एक रणनीतिक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है क्योंकि इससे भारत को पश्चिमी नदियों के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी, जो पहले सिंधु जल संधि के कारण सीमित थे। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के रामबन, रियासी और उदमपुर जिलों में चिनाब नदी पर बनाई जाएगी और इसकी कुल लागत लगभग ₹31,380 करोड़ अनुमानित है।
इस परियोजना के तहत कुल 1,856 मेगावाट बिजली उत्पादन करने की योजना है, जिसे दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में छह इकाइयों (प्रत्येक 225 मेगावाट) और एक 56 मेगावाट यूनिट शामिल हैं जबकि दूसरे चरण में अतिरिक्त दो 225 मेगावाट इकाइयाँ होंगी। यह एक “रन-ऑफ-द-रिवर” (run-of-the-river) परियोजना होगी, जिसका मतलब है कि यह नदी के प्रवाह का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करेगी बिना बड़े जल भंडारण संरचनाओं के। सरकार ने इस परियोजना के लिए पर्यावरण मंज़ूरी पहले ही दे दी है और अब इसके लिए NHPC (नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन) द्वारा टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। टेंडर में डाइवर्जेंट टनल, डैम और सहायक संरचनाओं के निर्माण जैसे काम शामिल हैं, और निर्माण कार्य के पूरा होने की समय सीमा करीब 3285 दिनों की बताई जा रही है।

सिंधु जल संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, जिसके तहत पश्चिमी नदियाँ (इंदुस, झेलम और चिनाब) पाकिस्तान के पक्ष में रखी गई थीं जबकि पूर्वी नदियाँ (सतलुज, ब्यास और रावी) भारत को मुक्त उपयोग के लिए दी गई थीं। इसके बावजूद भारत को अपने हिस्से के नदी पानी का पूरा उपयोग करने में सीमाएँ थीं। सिंधु जल संधि को इस साल अप्रैल में निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद से भारत ने कई बड़े जल-ऊर्जा प्रोजेक्टों को आगे बढ़ाया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से भारत अपनी घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ही उपयुक्त जल संसाधन प्रबंधन भी कर सकेगा, लेकिन पाकिस्तान ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है। दोनों देशों के बीच जल संसाधनों को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है और यह मुद्दा आगे भी चर्चा का विषय बन सकता है।