क्राइम रिपोर्ट : अन्नू दिवाकर

कानपुर की क्राइमब्रांच ने फर्जी जीएसटी गिरोह का बड़ा खुलासा किया है। यह गिरोह जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी और अस्तित्वहीन फर्में बनाकर जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर हासिल कर लेता था। इसके बाद बगैर किसी माल की खरीद-फरोख्त किए फर्जी टैक्स इनवॉइस व ई-वे बिल बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दुर्पयोग कर सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान पहुंचा रहे थे। पुलिस ने इंटरनेट के आईपी नंबर के आधार पर शातिर व गिरोह का सरगना सीए व उसके एक साथी को अरेस्ट कर लिया है।
डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने रविवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि कानपुर से लेकर यूपी के कई जिलों में फर्जी जीएसटी गिरोह सरकार से करोड़ों रुपए की ठगी को अंजाम दे रहा था। पूरे प्रदेश में सैकड़ों एफआईआर दर्ज हुई थीं। इसी तरह कानपुर में राज्य कर विभाग, उत्तर प्रदेश से प्राप्त सूचना के आधार पर थाना कल्याणपुर क्षेत्र में अपूर्वा ट्रेडिंग कंपनी के नाम से फर्जी जीएसटी पंजीकरण का मामला सामने आया था। इस पर कल्याणपुर थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। इस मामले की जांच क्राइमब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई थी। क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
फर्म के घोषित व्यापार स्थल मेहरबान सिंह के पुरवा में कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि नहीं पाई गई। स्थानीय लोगों के अनुसार न तो वहां कोई कारोबार संचालित हो रहा था और न ही संबंधित व्यक्ति वहां निवास करता था। फर्म से जुड़ा पंजीकृत मोबाइल नंबर भी बंद मिला। जांच के दौरान साफ हो गया कि अपूर्वा ट्रेडिंग कम्पनी एक बोगस फर्म है। जिसके जरिए अन्य फर्जी फर्मों को आउटवर्ड सप्लाई दिखाकर फर्जी टैक्स इनवॉइस और ई-वे बिल जनरेट किए गए। वर्ष 2019-20 के दौरान अभियुक्तों द्वारा लगभग 2.54 करोड़ रुपये टैक्स और 12.71 लाख रुपये पेनाल्टी, कुल 2.66 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी की गई।
इस केस का खुलासा करते हुए पुलिस ने शातिर बर्रा आदर्श नगर निवासी सीए कमल गौरव साहू और रावतपुर निवासी एतिशाम हुसैन को अरेस्ट किया है। पुलिस के दौरान पुलिस को कई अहम इनपुट मिले हैं। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से बैंक कार्ड, एंड्रॉइड व आई-फोन मोबाइल, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, ई-वे बिल, फर्जी इनवॉइस और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।