
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में Yogi Adityanath ने शंकराचार्य विवाद पर अपनी बात साफ़ रखी है। उन्होंने कहा कि हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं बता सकता क्योंकि यह पद सनातन परंपरा और नियमों के तहत मिलता है, और इसे मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने “शंकराचार्य” के सम्मान और मर्यादा का हवाला देते हुए यह भी कहा कि कानून सबके लिए समान है और किसी को भी नियमों और crowd management के नियमों का उल्लंघन करने की इजाज़त नहीं है।
सीएम ने ये बयान प्रयागराज के माघ मेले में हुए विवाद के संदर्भ में दिया, जहाँ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रथ से संगम पर जाने से रोका गया था। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कदम उठाया था, क्योंकि लाखों श्रद्धालु एक साथ मौजूद थे और नियमों का उल्लंघन नई भगदड़ जैसी खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता था। योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि कुछ लोग कानून और मर्यादा की बात करते हैं लेकिन स्वयं नियमों का उल्लंघन करने का समर्थन करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून किसी के लिए अलग नहीं चलता और आवश्यक है कि सभी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और नियमों का सम्मान करें।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “साढ़े 4 करोड़ श्रद्धालु जहां आए हों, वहां जो एग्जिट गेट है, जहां से श्रद्धालु स्नान करके बाहर निकलते हैं। उस द्वार, उस पंटून, उस मार्ग से किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं हो सकती। क्योंकि यदि कोई वहां से अंदर जाने का प्रयास करता है, तो वह एक नए स्टैम्पीड को जन्म देता है, नई भगदड़ की स्थिति पैदा करता है। वह श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ करता है।”
उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस प्रकार का आचरण नहीं कर सकता। कभी नहीं कर सकता। आपको पूछना है तो सभा के लोग पूछें, लेकिन हम लोग मर्यादित लोग हैं। कानून के शासन पर विश्वास करते हैं। कानून के शासन का पालन करना भी जानते हैं और पालन करवाना भी जानते हैं। दोनों चीजों को एक साथ लागू करना जानते हैं लेकिन इसके नाम पर लोगों को गुमराह करना बंद कीजिए।”