
25 फ़रवरी 2026 की प्रमुख खबर यह है कि इस समय भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियाँ जोर‑शोर से सुर्खियों में हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इज़राइल के दो‑दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान की यात्रा पर हैं। ये दोनों यात्राएँ अलग‑अलग मकसद लिए हुई हैं — मोदी रक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए इज़राइल में हैं, जबकि योगी आदित्यनाथ विदेशी निवेश और आर्थिक भागीदारी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सिंगापुर और जापान में हैं। प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल दौरा इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत‑इज़राइल के बीच रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयाँ मिल सकती हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिससे द्विपक्षीय रिश्ते और अधिक गहरे हो सकते हैं।
वहीं, योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान में निवेशकों, उद्योगपतियों और वैश्विक कंपनियों से मिलने के लिए विदेश दौरे पर हैं। सिंगापुर में उन्होंने दर्ज लाखों करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त किए हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सिंगापुर में योगी के नेतृत्व वाली टीम को लगभग ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनमें से लगभग ₹60 हजार करोड़ के एमओयू (MoUs) पर साइन भी किए जा चुके हैं। इन निवेश प्रस्तावों का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को 2029‑30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाना बताया जा रहा है। सिंगापुर दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने जेवर नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए भी विशेष समझौते किए। वैश्विक सेवा कंपनी AISATS के साथ करीब ₹4,458 करोड़ के निवेश समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिनसे लोजिस्टिक्स और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और हवाई अड्डे को एक महत्वपूर्ण कार्गो और सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय व्यापार नेताओं और विदेशी निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया और जापानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में उद्योग, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव व अन्य क्षेत्रों में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। खबरों के अनुसार, जापान में पहले ही दिन लगभग ₹11,000 करोड़ के MoU हुए हैं जिन पर हस्ताक्षर हुए, जिससे राज्य को निवेश और तकनीकी सहयोग मिलेगा। सिंगापुर में योगी ने सिंगापुर के राष्ट्रपति थारमन शम्मुगरत्नम सहित अन्य उच्च अधिकारियों से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर, नवाचार, कौशल विकास और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की। इन दोनों यात्राओं का मतलब यह है कि भारत अपनी वैश्विक रणनीति को आर्थिक, रक्षा और कूटनीति के स्तर पर समान रूप से मजबूत कर रहा है। जहां मोदी की यात्रा विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़ी चर्चा को बढ़ावा दे रही है, वहीं योगी की यात्राएँ निवेश और आर्थिक विकास के एजेंडे को आगे ले जा रही हैं।