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ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर, मोजतबा खामेनेई करेंगे अमेरिका का सामना

Mojtaba Khamenei

ईरान में जारी युद्ध के बीच देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। इसके साथ ही ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने उनके प्रति वफादारी की शपथ ली है। ईरान की “असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स” नाम की संस्था ने वोटिंग के बाद मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया। यह पद ईरान में सबसे शक्तिशाली माना जाता है और देश की सेना, सरकार और बड़े फैसलों पर अंतिम अधिकार इसी पद के पास होता है।

नए सुप्रीम लीडर की घोषणा के बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) समेत कई बड़े सैन्य और राजनीतिक नेताओं ने मोजतबा खामेनेई के प्रति पूरी निष्ठा जताई। उन्होंने कहा कि वे नए नेता के आदेशों का पूरी तरह पालन करेंगे और देश की रक्षा के लिए हर कदम उठाएंगे। इस बीच अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध भी लगातार तेज हो रहा है। इज़राइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और मिसाइल से जुड़े केंद्रों पर हमले किए हैं। वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है, जिससे पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई के चयन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका को भी ईरान के नेतृत्व को लेकर राय रखने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर नया नेता अमेरिका की नीतियों के खिलाफ जाएगा तो वह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। उनका कहना है कि अमेरिका और इज़राइल मिलकर ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करने के लिए काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि सत्ता लगभग परिवार के अंदर ही ट्रांसफर हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुल मिलाकर, ईरान में नेतृत्व परिवर्तन और अमेरिका-इज़राइल के साथ बढ़ते युद्ध ने पूरे मध्य-पूर्व को अस्थिर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष और बढ़ सकता है और इसका असर वैश्विक राजनीति तथा तेल बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।

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