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बाराबंकी : एक मार्कशीट पर दो सरकारी नौकरी का खेल खत्म, अदालत ने सुनाई 7 साल की सजा

रिपोर्ट : विजय तिवारी

बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)। फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे दो अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी करने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सख्त सजा सुनाई है। बाराबंकी की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सुधा सिंह की अदालत ने आरोपी जयप्रकाश सिंह को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

अभियोजन के अनुसार इस प्रकरण की शुरुआत 20 फरवरी 2009 को दर्ज कराई गई शिकायत से हुई। शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रभात सिंह ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव निवासी जयप्रकाश सिंह ने कूटरचित और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी करते हुए दो अलग-अलग स्थानों पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली है।

बताया जाता है कि इस पूरे मामले का खुलासा सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त जानकारी से हुआ। जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक प्रेम सिंह रैकवार को सौंपी गई, जिन्होंने जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों और सेवा अभिलेखों की पड़ताल कर साक्ष्य जुटाए। बाद में जांच पूरी होने पर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी की नियुक्ति जून 1993 में बाराबंकी जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर हुई थी। वहीं इससे पहले 26 दिसंबर 1979 को प्रतापगढ़ जिले में नॉन-मेडिकल असिस्टेंट के पद पर भी उसकी तैनाती हो चुकी थी। आरोप है कि आरोपी लंबे समय तक दोनों विभागों में कार्यरत रहा और दोनों स्थानों से वेतन व अन्य भत्तों का लाभ लेता रहा।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों, सेवा अभिलेखों और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों पर विचार करने के बाद सीजेएम कोर्ट नंबर-18 ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने अपने निर्णय में धोखाधड़ी और कूटरचना के अपराध को गंभीर मानते हुए जयप्रकाश सिंह को सात वर्ष के कठोर कारावास तथा 30 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सरकारी सेवाओं में फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के मामलों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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