
क्राइम रिपोर्टर :अन्नू दिवाकर
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के बिजवासन निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा पर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह चलाने का आरोप है। जांच में सामने आया कि उसने शेल कंपनियों, म्यूल बैंक खातों और दुबई के फिनटेक प्लेटफॉर्म के जरिए करीब 900 करोड़ रुपये विदेश भेजे। CBI अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
नई दिल्ली: सीबीआई ने हाल में ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत 15 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। CBI की इस कार्रवाई में जो खुलासा हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया। दरअसल ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम जॉब स्कैम के जरिए ठगों ने 900 करोड़ की धनराशि विदेश भेजी थी। इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का मास्टरमाइंड अशोक कुमार शर्मा है, जिसे हाल में ही ईडी ने गिरफ्तार किया था। अब सीबीआई ने इस आरोपी की कस्टडी मांगी है।
सीबीआई द्वारा की गई छापेमारी केदौरान जांच एजेंसियों को बड़ी मात्रा में दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले थे, जिससे एक संगठित अंतरराष्ट्रीय ठगी के नेटवर्क का पता चला।

कैसे लोगों को झांसे में लेता था CA?
CBI जांच में सामने आया कि यह गिरोह सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ऊंचे मुनाफे और पार्ट-टाइम नौकरी का लालच देता था।
ठग शुरुआत में निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए पहले पीड़ितों से छोटी रकम निवेश करवाते और नकली डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए फर्जी मुनाफा दिखाकर भरोसा बना लेते थे। निवेशकों को जाल में फंसाने के बाद उन्हें फिर अधिक फायदे का झांसा दिया जाता था। फिर बड़ी रकम निवेश करवा ली जाती थी।
एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए पहले ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए एक-दूसरे को ट्रांसफर किया जाता था। ताकि मनी ट्रेल छिपाई जा सके। इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड अशोक कुमार शर्मा करीब 15 शेल कंपनियों में पैसे जमा कर दो मुख्य कंपनियों के जरिए विदेश भेज देता था।
विदेश ट्रांसफर किए रुपये, दुबई कनेक्शन
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह ने दुबई स्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म PayPal समेत विदेशी चैनलों का इस्तेमाल किया। पैसा अंतरराष्ट्रीय डेबिट कार्ड, एटीएम निकासी और विदेशी वॉलेट टॉप-अप के जरिए बाहर भेजा गया, जिससे बैंकिंग सिस्टम में ये सामान्य POS ट्रांजैक्शन की तरह दिखे।
ठगी की धनराशि को भारत के वर्चुअल एसेट एक्सचेंज के जरिए स्टेबलकॉइन में बदला गया और व्हाइट लिस्टेड क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दिया गया, ताकि पैसे की रिकवरी मुश्किल हो सके।
बिना जानकारी के लोगों को बना दिया डायरेक्टर
CBI की जांच में यह भी सामने आया कि कई लोगों को उनकी जानकारी के बिना शेल कंपनियों का डायरेक्टर बना दिया गया था और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि सीबीआई ने सितंबर 2025 में कई संबंधित बैंक खातों और उनमें जमा धनराशि को फ्रीज कर दिया था, लेकिन निदेशकों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर हाल ही में की गई तलाशी से सीबीआई को शर्मा को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने के लिए आवश्यक सबूत मिल गए हैं।
CBI अब आरोपी से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों, विदेशी नागरिकों और विदेशों में घूम रहे बाकी पैसों का पता लगाने में जुटी है। एजेंसी पहले ही सितंबर 2025 में कई बैंक खातों को फ्रीज कर चुकी है।
