
ब्यूरो रिपोर्ट :सिटीजन बी अलर्ट
नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव में केवल 20 दिन बचे हैं, लेकिन कांग्रेस चुनाव में सत्ता की बाजी पलटने के लिए अपनी रणनीति को सिरे चढ़ाने की बजाय फिलहाल सूबे के कई वरिष्ठ नेताओं के पाला बदलने से लगे झटके को संभालने की कसरत करती दिखाई दे रही है।
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बीच अपने नेताओं के पार्टी छोड़ने के चलते चुनाव पार्टी को राज्य में गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है और चुनावी नैया डांवाडोल होने से बचाने के लिए कांग्रेस हाईकमान को चुनाव रणनीति पर नए सिरे से मंथन करने के लिए बाध्य कर दिया है। इस मंत्रणा के दौरान असम चुनाव के लिए पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों ने पाला बदलने से लगे झटके को पीछे छोड़ने के लिए कांग्रेसी विचारधारा के ऊंचे मनोबल के साथ कार्यकर्ताओं से जमीन पर जोर लगाने को कहा है।
पार्टी रणनीतिकारों के डैमेज कंट्रोल की इस रणनीति के बीच हकीकत यह भी है कि राज्य में अंदरूनी मतभेदों और संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही कांग्रेस के लिए असम की चुनावी तैयारियों की चिंता गहरी कर दी है।
चुनाव के दौरान नगांव से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के एक दिन पहले पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल होने से लगे झटके के बाद बुधवार रात असम की चुनावी चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत वरिष्ठ रणनीतिकारों ने मंत्रणा की। इसमें असम के प्रभारी महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह, राज्य के वरिष्ठ चुनाव पर्यवेक्षक भूपेश बघेल तथा कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार सहित कुछ अन्य नेता शामिल हुए।
बताया जाता है कि इसमें राय जाहिर की गई कि वर्तमान अंदरूनी झंझावत से निपटने के लिए चुनाव में कांग्रेस की विचारधारा और राजनीतिक नैतिकता के मानकों को मजबूती से चुनाव अभियान में रखते हुए न केवल पाला बदलने वाले नेताओं को कटघरे में खड़ा किया जाएगा, बल्कि चुनावी सियासत में भ्रष्ट आचरण को प्रोत्साहित करने के लिए भाजपा पर भी कांग्रेस नेता हमलावर रहेंगे।
इस बैठक के बाद डीके शिवकुमार ने एक्स पर एक संक्षिप्त बयान में कहा कि प्रियंका गांधी के नेतृत्व में आयोजित असम चुनाव रणनीति बैठक से स्पष्ट है कि एकजुटता और नए संकल्प के साथ हम उस बदलाव को लाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे जिसकी असम की जनता को पूरी उम्मीद है।
लोकसभा सांसद बोरदोलोई से पूर्व पिछले कुछ दिनों में असम कांग्रेस के कई नेताओं ने चुनाव की दहलीज पर पार्टी छोड़ दी। इसमें असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा भी शामिल हैं, जिन्होंने बोरदोलोई की तरह तत्काल भाजपा का दामन थामने में कोई संकोच नहीं किया था।
इसके अलावा बोडो इलाके के उसके एक प्रमुख नेता प्राणेश्वर बसुमतारी से लेकर पूर्व विधायक मनोरंजन दास सरीखे लोगों ने भी पार्टी को गच्चा देकर भाजपा का पटका पहन लिया। इन तमाम नेताओं ने उम्मीदवारों के चयन से लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई द्वारा अनुभवी नेताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
नेताओं के पाला बदलने की यह घटनाएं ठीक ऐसे नाजुक समय पर हुई हैं जब कांग्रेस इस चुनाव में भाजपा के 10 साल के शासन के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाकर अपनी सियासी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रही थी। तरूण गोगोई के नेतृत्व में लगातार तीन बार असम की सत्ता में रही कांग्रेस 2016 में भाजपा से मिली मात के बाद राज्य में एक भी चुनाव नहीं जीत पाई है।
हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में जोरहाट से गौरव गोगोई की जीत के बाद कांग्रेस को कुछ हद तक नई जान मिली और इसी बुनियाद पर पार्टी ने गोगोई को विधानसभा में अपना चुनावी चेहरा बनाया है। बहरहाल, पाला बदल के इन झटकों के बीच अगले 20 दिनों में कांग्रेस के सामने अपनी एकता कायम रखते हुए असम के मतदाताओं का विश्वास जीतने की चुनौती आसान नहीं है।