
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और NATO के बीच हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। ताज़ा घटनाक्रम में NATO महासचिव मार्क रुटे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का समर्थन किया है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने के मुद्दे पर। रिपोर्ट्स के अनुसार, NATO और उसके सहयोगी देश अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की तैयारी में हैं, जिसका मकसद इस अहम समुद्री मार्ग को खुला रखना है। करीब 22 देशों ने इस पहल में शामिल होने की सहमति दी है, जिनमें ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं।
मार्क रुटे ने साफ कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद जरूरी है, और इसे सुरक्षित करना अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने ट्रंप के इस दबाव का समर्थन किया कि सहयोगी देश आगे आकर इस संकट का समाधान करें। दरअसल, ईरान द्वारा इस जलमार्ग को बाधित करने के बाद दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वह जलडमरूमध्य को खोले, वरना उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला किया जा सकता है। इस चेतावनी के बाद तनाव और बढ़ गया है।

ईरान ने भी कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह होर्मुज को पूरी तरह बंद कर देगा और अमेरिकी हितों को निशाना बनाएगा। हालांकि, पहले NATO के कई देश इस सैन्य कार्रवाई से दूरी बना रहे थे और इसे “अमेरिका का युद्ध” बता रहे थे, लेकिन अब धीरे-धीरे समर्थन बढ़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठबंधन अगर सक्रिय हुआ, तो यह सिर्फ समुद्री सुरक्षा ही नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व में सैन्य टकराव को और बढ़ा सकता है। साथ ही, इसका सीधा असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है, क्योंकि तेल आपूर्ति और कीमतें इससे जुड़ी हैं।