
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बढ़ते असर को देखते हुए Narendra Modi देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अहम बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मौजूदा हालात की समीक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि देश किसी भी संभावित संकट के लिए पूरी तरह तैयार रहे। जानकारी के मुताबिक, इस दौरान केंद्र सरकार राज्यों से जमीनी स्थिति का फीडबैक लेगी और आवश्यक कदमों पर चर्चा करेगी। सरकार पहले ही इस संकट को लेकर सक्रिय नजर आ रही है। संसद में प्रधानमंत्री ने इस स्थिति को “चिंताजनक” बताते हुए कहा था कि इसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव के कारण भारत की तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इसी बीच केंद्र सरकार ने विभिन्न स्तरों पर तैयारियों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इससे पहले एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई थी, जिसमें सरकार ने सभी राजनीतिक दलों को स्थिति की जानकारी दी और एकजुट होकर संकट से निपटने की अपील की। इसके अलावा, सरकार ने अलग-अलग सेक्टर जैसे ऊर्जा, जरूरी वस्तुएं और सप्लाई चेन पर नजर रखने के लिए विशेष समूह भी बनाए हैं। मुख्यमंत्रियों के साथ होने वाली यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि किसी भी वैश्विक संकट का सीधा असर राज्यों पर पड़ता है।

ऐसे में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाना जरूरी है, ताकि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, कीमतों पर नियंत्रण और आम जनता की जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सके। कुल मिलाकर, यह बैठक देश की तैयारियों को मजबूत करने और संभावित आर्थिक व ऊर्जा संकट के प्रभाव को कम करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। सरकार का फोकस साफ है—स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए समय रहते जरूरी फैसले लेना, ताकि देश पर इसका असर न्यूनतम हो।