
दारा सिंह, जिनका नाम भारतीय मनोरंजन के इतिहास में एक जरुरी हिस्से की तरह लिया जाता है, उन्होंने रामायण में भगवान हनुमान का किरदार निभाकर अपनी पहचान अमर कर दी थी। बीआर चोपड़ा की प्रसिद्ध टीवी सीरियल रामायण (1980 के दशक) में 60 वर्ष की उम्र में हनुमान के रोल के लिए चुने गए दारा सिंह ने इस भूमिक को निभाने के लिए कई बड़े त्याग किए। उन्होंने सेट पर अपने गेटअप के लिए रोजाना 4 घंटे तक मेकअप करवाया, जिसके कारण उन्हें खाना‑पीना और सामान्य ढंग से बैठना भी मुश्किल हो जाता था। इस भारी मेकअप और पूंछ के गेटअप के कारण वे लगभग 8‑9 घंटे तक भूखे रहते थे, क्योंकि चेहरे पर लगे मास्क के कारण कुछ भी खाना आसान नहीं था। उनके बेटे विंदू दारा सिंह ने बताया था कि अपने किरदार को निभाने की तैयारी में वे सुबह उठकर लगभग एक घंटे तक हनुमान की प्रैक्टिस किया करते थे।
दारा सिंह, जो आमतौर पर रोज़ नॉनवेज खाते थे, हनुमान बनने के लिए शाकाहारी भी बन गए थे, जिससे उनकी भूमिका में आत्मसमर्पण और दृढ़ता दिखती थी। दारा सिंह ने शुरुआत में यह रोल लेने से इनकार भी किया था, यह कहते हुए कि वे “60 साल के हो चुके हैं और शायद किसी यंग कलाकार को यह भूमिका सूट करेगी।” लेकिन रामानंद सागर ने उन पर भरोसा रखा और दारा सिंह को ही हनुमान के किरदार के लिए अंतिम रूप से चुना गया। उनकी लंबी कद‑काठी और सहज स्वभाव ने इस रोल को और भी प्रभावशाली बनाया। भले ही उनके डायलॉग उनके अपने आवाज़ में न हों — सेट पर उन्हें डबिंग आर्टिस्ट की सहायता लेनी पड़ी क्योंकि उनकी हिंदी थोड़ी कमजोर थी — लेकिन दर्शकों ने उन्हें हनुमान के रूप में पूरी श्रद्धा और प्रेम से स्वीकार किया।

उनकी भूमिका इतनी प्रभावशाली रही कि लोग उन्हें हनुमान समझकर पूजने तक लगे थे, और आज भी रामायण के इस किरदार को भारतीय टेलीविजन की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में से एक माना जाता है। दारा सिंह का निधन 2012 में हो गया, लेकिन उनके हनुमान के किरदार की विरासत आज भी जीवित है, और हनुमान जयंती के पावन पर्व पर लोग उन्हें और उनकी भूमिका को सम्मान की नज़र से देखना नहीं भूलते। पारिवारिक समर्पण, कठिन मेहनत और धर्म‑भक्ति के मिश्रण ने दारा सिंह को उस भूमिका के लिए आज भी अमर बना दिया है, जिसे लाखों लोग सालों से श्रद्धा और प्रेम से याद करते हैं।