
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता एवं विधायक सौरभ भारद्वाज ने पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा द्वारा जारी वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें चड्ढा ने कहा था कि उन्हें पार्टी के नेतृत्व के दबाव में “खामोश” कर दिया गया है। यह वीडियो राघव चड्ढा द्वारा उनके राज्यसभा उपनेता के पद से हटाए जाने के कुछ समय बाद आया है एक कदम जिसने पार्टी के अंदरूनी राजनीति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चड्ढा ने अपने वीडियो संदेश में दावा किया कि उन्होंने सदन में हमेशा आम नागरिकों के मुद्दों को उठाया है और सवाल किया, “क्या मैंने कुछ गलत किया है?” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को कहा है कि उन्हें पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें संसद में आवाज़ उठाने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने चड्ढा का वीडियो देखा है और उन्हें याद दिलाया कि AAP के नेता हमेशा सीधी और निडर राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा, “जो डर गया, समझो मर गया”, और जोर देकर कहा कि पार्टी को सचमुच देश के प्रमुख मुद्दों जैसे मतदाता सूची के बदलाव, फर्जी वोट और चुनाव प्रणाली में अनियमितताओं पर ध्यान देना चाहिए। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए बड़े मुद्दों पर AAP का रुख अधिक सक्रिय नहीं रहा और पार्टी ने प्रधानमंत्री या बीजेपी सरकार से सीधे सवाल पूछने में संकोच किया है। उन्होंने कहा कि संसद में ‘सॉफ्ट PR’ (हल्का प्रचार) करने से कुछ हासिल नहीं होगा, बल्कि गंभीर मुद्दों पर जोर देना जरूरी है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हाल के मामलों में, जब कई राज्यों में चुनावों से पहले मतदाताओं की संख्या घटाई गई और कथित रूप से नकली वोट बनाए गए, तो पार्टी को उस पर भी तेज़ प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। भारद्वाज ने कहा कि प्रत्येक नेता को जनता के मुद्दों को सरकार की आँख में आँख डालकर उठाना चाहिए। सौरभ भारद्वाज की प्रतिक्रिया राजनीतिक विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह AAP के भीतर नेतृत्व, रणनीति और आगे की दिशा को लेकर मतभेदों को उजागर करती है। चड्ढा का वीडियो संदेश और पार्टी की प्रतिक्रिया संकेत हैं कि AAP के अंदर विचारों का टकराव और राजनीति की दिशा को लेकर गंभीर बहस चल रही है।