
रिपोर्ट : विजय तिवारी
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रभावी और निर्णायक जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को सूरत पहुंचे। गुजरात दौरे के दौरान एक बड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने बिहार के चुनाव परिणामों को “भारतीय राजनीति में बदलते जनमत का बड़ा संकेत” बताया और विपक्षी दलों की जातिगत राजनीति पर तीखा प्रहार किया।
सूरत में सभा — विपक्ष पर सीधा हमला, जनता के जनादेश का संदर्भ
सूरत में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने बिना किसी का नाम लिए उन नेताओं को निशाने पर लिया, जिन्होंने पूरे चुनाव प्रचार में जाति-आधारित अपीलों पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा—
“बिहार में कुछ जमानती नेता बार-बार जातिवाद का भाषण देने पहुंचते थे। समाज को बांटने की कोशिश की गई, जाति का ज़हर फैलाने की हर कोशिश हुई। पुरानी राजनीति में इसी को हथियार माना जाता था। लेकिन इस बार बिहार की जनता ने जातिवाद की पूरी राजनीति को सिरे से खारिज कर दिया।”
सभास्थल पर मौजूद लोगों से मिली प्रतिक्रिया के बीच पीएम मोदी ने दावा किया कि बिहार में मिले जनादेश का संदेश स्पष्ट है—“विकास की राजनीति, विभाजन की राजनीति पर भारी पड़ी है।”

जनता का रुझान — जाति बनाम विकास की बहस में निर्णायक बदलाव
प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार के मतदाताओं ने इस चुनाव में जाति आधारित ध्रुवीकरण के पुराने फॉर्मूले को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने बताया कि युवाओं ने नौकरी, शिक्षा और अवसरों को प्राथमिकता दी, महिलाओं ने सुरक्षा, योजनाओं के लाभ और स्थिर शासन के पक्ष में वोट किया, पहली बार वोटर्स ने “बदलती राजनीति” की दिशा तय की, जिसके चलते एनडीए को मजबूत और स्थिर जनादेश मिला। पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में जनता का झुकाव “काम की राजनीति” की ओर और अधिक तेज़ी से बढ़ेगा। विपक्ष की रणनीति पर करारा तंज — “पुरानी मानसिकता की हार” सभा के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि—
चुनाव प्रचार में जातीय गठजोड़ और नकारात्मक अभियानों पर ज़ोर दिया गया, विकास, सुशासन और योजनाओं की ईमानदार चर्चा से विपक्ष पूरी तरह दूर रहा, जनता को बांटने की कोशिश अब “चलने वाली रणनीति” नहीं रही। प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज को तोड़ने की राजनीति को बिहार की जनता ने पहली बार खुलकर चुनौती दी है। राजनीतिक संकेत — भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी का यह बयान केवल बिहार के नतीजों पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के भविष्य का संकेत भी है। जातिगत समीकरणों की पकड़ कमजोर पड़ रही है, विकास और डिलीवरी-आधारित राजनीति को मतदाता प्राथमिकता दे रहे हैं,
युवाओं का रुझान जाति-आधारित भाषणों से तेजी से दूर हो रहा है,
और बिहार का परिणाम आने वाले बड़े राज्यों में होने वाले चुनावों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है।
सूरत में दिए गए प्रधानमंत्री के संदेश को इस रूप में भी देखा जा रहा है कि अब जातिवाद की राजनीति राष्ट्रीय स्तर पर चुनौती का सामना कर रही है और बिहार इस बदलाव का सबसे ताज़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
