राइटर-दीपाक्षी शर्मा

वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो एक बार फिर दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई हैं। उन्हें लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए लंबे समय से किए गए संघर्ष के लिए 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। मचाडो वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाली सबसे मजबूत नेताओं में से एक मानी जाती हैं। हाल ही में मारिया कोरिना मचाडो ने अमेरिका का दौरा किया, जहां उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की।
इस मुलाकात के दौरान उन्होंने एक प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल ट्रंप को भेंट किया। मचाडो ने कहा कि यह कदम अमेरिका और ट्रंप द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन के सम्मान में उठाया गया है। ट्रंप ने भी मचाडो की सराहना की और उन्हें साहसी नेता बताया। हालांकि इस घटना के बाद विवाद भी खड़ा हो गया है। नोबेल पुरस्कार समिति के नियमों के अनुसार, नोबेल शांति पुरस्कार को किसी दूसरे व्यक्ति को आधिकारिक रूप से ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। इसलिए मचाडो का यह कदम केवल प्रतीकात्मक माना जा रहा है, न कि कानूनी या औपचारिक।

मारिया कोरिना मचाडो पिछले कई वर्षों से वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली, निष्पक्ष चुनाव और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए संघर्ष कर रही हैं। 2024 के चुनावों के बाद राजनीतिक हालात बिगड़ने पर उन्हें कई बार धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ा, जिसके चलते वे लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहीं। इस पूरी घटना ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे लोकतंत्र के समर्थन का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि