
डेस्क रिपोर्ट : विजय तिवारी
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव का परिवार एक बार फिर राजनीतिक भूचाल के केंद्र में आ गया है। पहले से चल रहे मतभेदों के बीच नतीजों ने तनाव को और गहरा कर दिया है। ऐसे माहौल में लालू की बेटी रोहिणी आचार्य के भावनात्मक ट्वीट ने पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
चुनाव परिणामों में एनडीए ने 202 सीटें जीतकर मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया। नतीजों के तुरंत बाद तेज प्रताप यादव ने अपने ही भाई तेजस्वी पर निशाना साधते हुए उन्हें “फेलस्वी” कहा और एनडीए नेताओं की तारीफ करके संकेत दे दिया कि परिवार के भीतर की दूरी अब खुलकर सामने आ चुकी है।
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा—
“I’m quitting politics and I’m disowning my family… This is what Sanjay Yadav and Rameez had asked me to do… and I’m taking all the blame’s.”

उनका यह बयान लालू परिवार में पहले से मौजूद मतभेदों को और उजागर करने वाला साबित हुआ है। तेजस्वी और तेज प्रताप के बीच की खटास लंबे समय से चर्चा का विषय रही है, और अब बहन रोहिणी का यह कदम स्थिति को और जटिल बनाता दिख रहा है।
तेजस्वी–तेजप्रताप विवाद की पृष्ठभूमि
तेज प्रताप यादव ने चुनाव से पहले ही राजनीतिक अलगाव को नया रूप देते हुए अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वहीं तेजस्वी यादव अपनी सीट पर जीतकर महागठबंधन के प्रमुख चेहरे बने रहे।
इस वैचारिक टकराव ने परिवार के भीतर की आपसी राजनीति को और खुलकर सामने ला दिया।
संजय यादव और रमीज़ को लेकर उठे सवाल
रोहिणी के पोस्ट में जिन दो नामों—संजय यादव और रमीज़—का ज़िक्र है, वे आरजेडी की रणनीतिक सर्किल में काफी चर्चा में रहे हैं।
संजय यादव आरजेडी के राज्यसभा सांसद और तेजस्वी के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सलाहकारों में गिने जाते हैं। वहीं रमीज़ तेजस्वी के पुराने साथी माने जाते हैं, जिनका संबंध उत्तर प्रदेश के एक राजनीतिक परिवार से बताया जाता है।
चुनाव से पहले भी रोहिणी ने एक वायरल तस्वीर को लेकर संजय यादव पर सवाल उठाए थे, जिसमें वह तेजस्वी की “बिहार अधिकार यात्रा” में फ्रंट सीट पर बैठे दिख रहे थे। रोहिणी ने इसे “शीर्ष नेतृत्व का अपमान” कहा था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा और उन्होंने संजय को ‘जयचंद’ बताते हुए कई आरजेडी नेताओं को अनफॉलो कर दिया था।
तेज प्रताप पहले ही संजय को परिवार में दरार पैदा करने वाला व्यक्ति बताते रहे हैं।

रोहिणी आचार्य का पारिवारिक जुड़ाव
यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि रोहिणी आचार्य अपने पिता लालू प्रसाद यादव के बहुत करीब मानी जाती हैं।
2022 में उन्होंने अपने पिता को किडनी दान की थी, जिसकी देशभर में सराहना हुई थी। वह सिंगापुर में रहती हैं, लेकिन इस चुनाव में बिहार आकर तेजस्वी के लिए सक्रिय रूप से प्रचार कर रही थीं और 2024 लोकसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं, जिसमें उन्हें हार मिली थी।
राजनीतिक असर और आगे की दिशा
रोहिणी के हालिया पोस्ट ने न सिर्फ परिवार की अंदरूनी स्थिति को उजागर किया है, बल्कि आरजेडी की रणनीति और नेतृत्व क्षमताओं पर भी सवाल खड़े किए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिवार के भीतर यह खुला विवाद पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और उसकी राज्य में भविष्य की राजनीति पर प्रभाव डाल सकता है।
फिलहाल, आरजेडी या लालू परिवार की ओर से इस पूरे मामले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।