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सुप्रीम कोर्ट में अनिल अंबानी का हलफनामा: बिना अनुमति नहीं छोड़ेंगे भारत

नई दिल्ली: उद्योगपति अनिल धीरुभाई अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में एक अहम हलफनामा (Affidavit) दायर किया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे बिना अदालत की पूर्व अनुमति भारत नहीं छोड़ेंगे। यह हलफनामा जारी किया गया है जब अदालत के समक्ष उनके खिलाफ चल रही बैंक लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जांच का मामला सुना जा रहा है। अंबानी के इस हलफनामे में उन्होंने कहा कि उन्होंने जुलाई 2025 के बाद से देश नहीं छोड़ा है और वर्तमान में भी उनका विदेश यात्रा का कोई कार्यक्रम नहीं है। अगर भविष्य में किसी आवश्यक वजह से उन्हें विदेश जाना पड़े, तो वह पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेंगे — यह उन्होंने तय वक्त पर अदालत के समक्ष औपचारिक रूप से लिखकर जमा कराई।

यह मामला एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) के रूप में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें पूर्व आईएएस अधिकारी ई.ए.एस. सरमा द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनिल अंबानी समूह (ADAG) से जुड़े कई संगठनों ने लगभग ₹40,000 करोड़ के बैंक ऋण धोखाधड़ी और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग में भाग लिया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से जांच को सीबीआई और एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के नियंत्रण में रखने और उसे कोर्ट-निगरानी में तेज, निष्पक्ष और विस्तृत रूप से आगे बढ़ाने की मांग की है। अंबानी ने अपने हलफनामे में और कहा कि वह जांच एजेंसियों — ED और CBI — के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और जांच में बाधा नहीं डालेंगे। उन्होंने अदालत को यह भरोसा दिया कि वह किसी भी तरह से जांच प्रक्रिया से बचने की कोशिश नहीं करेंगे, और कोई भी कदम नियमों के तहत लिया जाएगा। अदालत ने भी जांच की धीमी गति पर चिंता जताई थी और कहा था कि यह तेजी से निष्पादित हो।

आदर-सत्कार के साथ दायर हलफनामे में अंबानी ने यह भी बताया कि उन्होंने अभी तक विदेश यात्रा नहीं की है क्योंकि जांच पिछले साल जुलाई से जारी है, और उन्होंने आगे भी सहयोग करने का आश्वासन दिया। ED ने अंबानी को 26 फरवरी 2026 को अपने समन पर उपस्थित होने के लिए भी तलब किया है — जिसे उन्होंने स्वीकार किया है और उपस्थित होने का वादा किया है। इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही विशेष जांच टीम (SIT) के गठन और जांच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे अलग-अलग बैंकों द्वारा दर्ज शिकायतों के आधार पर अलग FIR दर्ज करें और जांच को व्यापक तरीके से आगे बढ़ाएं, ताकि वित्तीय अनियमितताओं का पूरा सत्य सामने आ सके।

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