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Diwali Special: 30 सालों की परंपरा: काशीपुर की रामलीला बनी श्रद्धा, संस्कृति और समाज का संगम

प्रयागराज : काशीपुर में गूंजा ‘जय श्रीराम’ — श्री जन कल्याण रामलीला समिति का भव्य ऐतिहासिक मंचन बना आस्था और संस्कृति का उत्सव“जहां संवादों में धर्म की गूंज थी, वहीं मंच पर मर्यादा की पराकाष्ठा दिखी”फूलपुर (प्रयागराज ) :फूलपुर तहसील क्षेत्र के काशीपुर गांव की पावन धरती पर इस वर्ष “श्री जन कल्याण रामलीला समिति” द्वारा आयोजित भव्य और ऐतिहासिक रामलीला मंचन ने धर्म, संस्कृति और समाज के संगम का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

आयोजन की भव्यता, सजीव अभिनय और धार्मिक वातावरण ने न केवल दर्शकों को भावविभोर किया, बल्कि पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और गर्व की भावना भर दी।तीन दशकों से चली आ रही इस परंपरा ने इस वर्ष अपनी 30वीं वर्षगांठ के साथ इतिहास रच दिया। कार्यक्रम के हर दृश्य में आस्था की ज्योति और संवादों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों की झलक दिखी।भव्य मंचन, प्रभावशाली अभिनय :अंकुर मिश्र ने भगवान श्रीराम के रूप में अपनी शांत मुद्रा, गूढ़ संवाद और संयमित भावों से अभिनय कर सबका मन मोह लिया।अभि मिश्र ने लक्ष्मण के रूप में भाईचारे और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की।

कृष्णा दुबे ने सीता माता के रूप में श्रद्धा और शील की मूर्ति बनकर मंच को दिव्यता दी। श्री संग्राम सिंह मौर्य ने रावण के रूप में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति और दमदार संवादों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जबकि मिलन मिश्र ने मेघनाद के किरदार को बखूबी जीवंत किया।आयोजन बना सामाजिक एकता का प्रतीक :रामलीला केवल धार्मिक उत्सव नहीं रही, बल्कि इसने समाज में सदाचार, सहयोग और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।

आयोजन में ग्रामवासियों का जोश, बच्चों की भागीदारी और महिलाओं का योगदान इस बात का प्रमाण है कि जब समाज एक साथ चलता है, तो संस्कृति स्वयं संजीवनी बन जाती है।निर्देशन और सहयोग :इस दिव्य आयोजन का सफल निर्देशन राममुकुंद मिश्र ने किया, जबकि ब्यास प्रेषित मिश्र ने अपने संवादों और भक्ति भावना से कथा को आत्मीयता दी। मंचन में मनोज मिश्र, कुशाग्र मिश्र, अंकित मिश्र, विवेक मिश्र, बादल मिश्र, संजीव पाल, युगांक मिश्र, सोनू मिश्र, सचिन मिश्र और कल्लू मौर्य सहित अनेक कलाकारों का योगदान अविस्मरणीय रहा।ग्रामवासियों का सहयोग बना आयोजन की आत्मा:ग्रामवासियों के सहयोग, समर्पण और सहभागिता ने इस आयोजन को वास्तविक सफलता दिलाई।

मंच के निर्माण से लेकर अंतिम दृश्य तक, हर चरण में लोगों का सामूहिक श्रम और श्रद्धा झलकती रही।आयोजक मंडल का संदेश :> “रामलीला केवल एक नाट्य मंचन नहीं, बल्कि हमारे समाज के मूल्यों और परंपराओं की जीवंत धरोहर है। श्रीराम के आदर्श हमें याद दिलाते हैं कि जीवन में सत्य, संयम और सेवा ही सर्वोच्च हैं।”सांस्कृतिक सार :“काशीपुर की यह रामलीला केवल कहानी नहीं, बल्कि हर पीढ़ी के लिए सीख है — कि अधर्म चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, धर्म और मर्यादा की ज्योति सदा प्रज्ज्वलित रहती है।”

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