
अमेरिका के ऊर्जा मंत्री की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच एक बड़ा बयान सामने आया है, जिससे वैश्विक तेल बाजार को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दरअसल, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा डालने के बाद दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि यदि समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए जाते हैं, तो यह तेल अगले 3 से 4 दिनों के भीतर एशियाई देशों के बंदरगाहों तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि यह कदम वैश्विक सप्लाई को तुरंत बढ़ाने और बाजार में स्थिरता लाने के लिए उठाया जा रहा है।
दरअसल, बड़ी मात्रा में ईरानी कच्चा तेल टैंकरों में समुद्र में ही फंसा हुआ है, क्योंकि उस पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं। ऐसे में अमेरिका इन प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है ताकि इस तेल को बाजार तक पहुंचाया जा सके। अमेरिकी ट्रेजरी से भी संकेत मिले हैं कि इस दिशा में जल्द फैसला लिया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह तेल बाजार में पहुंचता है तो पहले यह रिफाइनरियों तक जाएगा और फिर 30 से 45 दिनों के भीतर पूरी तरह ग्लोबल मार्केट में शामिल हो सकेगा। इससे तेल की बढ़ती कीमतों पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। हालिया तनाव और हमलों के कारण यहां से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई और कीमतें चार साल के उच्च स्तर तक पहुंच गईं। इस बीच, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले ही तेज़ी से बढ़ चुकी हैं और कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम अस्थायी राहत देने वाला माना जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, तब तक पूरी तरह स्थिरता आना मुश्किल है। कुल मिलाकर, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री का यह बयान संकेत देता है कि आने वाले दिनों में तेल सप्लाई में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन मिडिल ईस्ट की स्थिति पर ही आगे का रुख निर्भर करेगा।