
मध्य-पूर्व में चल रही जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका अगले एक हफ्ते के भीतर ईरान पर “बहुत बड़ा हमला” कर सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है और इसका असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर भी पड़ रहा है। दरअसल, पिछले करीब दो हफ्तों से मध्य-पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों से जवाबी कार्रवाई की है। इस संघर्ष में हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं और कई खाड़ी देशों में भी तनाव बढ़ गया है।
युद्ध के कारण दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर भी बड़ा असर पड़ा है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने और जहाजों पर हमलों की वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। यह समुद्री रास्ता बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। इस वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका ने दुनिया के देशों को 30 दिनों के लिए रूसी कच्चा तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे दी है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बताया कि 12 मार्च तक जहाजों में लदे रूसी तेल के लेनदेन को 11 अप्रैल तक अनुमति दी जाएगी। इसका मकसद वैश्विक बाजार में तेल की कमी को कुछ हद तक कम करना है।

इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि समुद्र में फंसे करीब 120 मिलियन बैरल से ज्यादा रूसी तेल को बाजार में पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि यह सिर्फ अस्थायी और सीमित कदम है, जिससे रूस को बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा। उधर ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों या बंदरगाहों पर हमला हुआ तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को निशाना बना सकता है। इस चेतावनी ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध और बढ़ता है या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है तो दुनिया भर में तेल और ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व की स्थिति और भी महत्वपूर्ण बन गई है।