
भारत को उसका नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार सुबह राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में देश के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य, सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा और पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ वकील और अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। समारोह का माहौल औपचारिक और गरिमामय रहा। जस्टिस सूर्यकांत की कार्यकाल अवधि लगभग 15 महीने की होगी और वे फरवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। वे लंबे समय से न्यायिक सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
हरियाणा के हिसार में जन्मे सूर्यकांत ने अपने करियर की शुरुआत एक वकील के रूप में की थी। बाद में वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में न्यायाधीश बने। इसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जहाँ उनके फैसलों और कार्यशैली की खूब सराहना हुई। 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए और अब देश की सर्वोच्च न्यायपालिका का नेतृत्व संभाल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस सूर्यकांत कई महत्वपूर्ण बेंचों का हिस्सा रहे हैं। उनके फैसले संवैधानिक मुद्दों, मानवाधिकार, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार विरोधी मामलों और सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर उनकी स्पष्ट सोच को दर्शाते हैं।

वे न्यायपालिका में पेंडिंग मामलों को कम करने और न्याय प्रक्रिया को तेज व पारदर्शी बनाने पर जोर देते रहे हैं। यही कारण है कि CJI बनने के बाद भी उन्होंने न्यायिक सिस्टम में लंबित मामलों को कम करना अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया है। नई जिम्मेदारी के साथ जस्टिस सूर्यकांत के सामने कई चुनौतियाँ होंगी, लेकिन कानूनी मामलों की गहरी समझ और संतुलित दृष्टिकोण के कारण उनसे काफी उम्मीदें भी की जा रही हैं।