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सोनभद्र में बड़ा खनन हादसा: कृष्णा माइनिंग वर्क्स की खदान धंसी, एक मजदूर की मौत–कई लापता; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

रिपोर्ट : विजय तिवारी

सोनभद्र।
जिले के ओबरा क्षेत्र स्थित बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में शनिवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया, जब कृष्णा माइनिंग वर्क्स की गहरी पत्थर खदान अचानक धंस गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में एक मजदूर की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 15 से अधिक मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। देर शाम तक मृतक की पहचान नहीं हो सकी थी।

हादसा दोपहर करीब 3 बजे उस समय हुआ जब खदान में एक साथ 9 कंप्रेसर मशीनों से ड्रिलिंग का काम चल रहा था। प्रत्येक मशीन पर दो मजदूर लगाए गए थे, और कुल 18 मजदूर मौके पर मौजूद बताए जाते हैं। ड्रिलिंग के दौरान चट्टान का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा और देखते ही देखते खदान का बड़ा हिस्सा भरभराकर धंस गया।

हादसे के तुरंत बाद खदान के मालिक और पार्टनर मौके से फरार हो गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।

रेस्क्यू में बाधा : गहरी खदान और अंधेरा बना चुनौती

मौके पर हड़कंप मच गया। चीख-पुकार के बीच आसपास के मजदूरों ने राहत कार्य शुरू किया, लेकिन खदान की गहराई और लगातार गिरते मलबे के कारण बचाव कार्य मुश्किल हो गया।
शाम 7:15 बजे के बाद अंधेरा बढ़ने से सर्च ऑपरेशन और मुश्किल होता गया।

जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह, एसपी अभिषेक वर्मा, समाज कल्याण राज्यमंत्री संजय सिंह गोंड, भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल, खनन विभाग, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची।

स्थिति गंभीर देखते हुए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को भी तत्काल बुलाया गया है। प्रशासन ने ओबरा तापीय परियोजना, दूसान कंपनी और अल्ट्राटेक से भारी मशीनरी और तकनीकी सहयोग मांगा है।

लापता मजदूरों की पहचान में जुटे परिजन

हादसे से बच निकले पनारी गांव के छोटू यादव ने बताया कि उसके दो भाई—इंद्रजीत यादव और संतोष यादव—अभी भी मलबे में दबे हुए हैं।
इसी तरह ग्राम प्रधान लक्ष्मण यादव ने बताया कि खड़री टोला के रामखेलावन, अशोक और कृपाशंकर भी खदान में मजदूरी करने आए थे, जिनका कोई पता नहीं चल सका है।

स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठा हैं और पुलिस लाउडस्पीकर के जरिए शांति बनाए रखने और रेस्क्यू टीम को सहयोग देने की अपील कर रही है।]

अधिकारियों का बयान

जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने कहा—
“खदान धंसने की घटना गंभीर है। कितने मजदूर मलबे में दबे हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू है। हादसे के कारणों की जांच कराई जाएगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।”

उन्होंने बताया कि खदान 2026 तक वैध है, लेकिन सुरक्षा मानकों और ड्रिलिंग के दौरान पालन किए गए नियमों की जांच की जाएगी।

इलाके में दहशत, प्रशासन हाई अलर्ट पर

हादसे के बाद इलाके में दहशत और तनाव का माहौल है। खदान के भीतर फंसे मजदूरों को निकालने के लिए रातभर अभियान जारी रहेगा। रेस्क्यू टीमों को गहरी खदान में पहुंचना कठिन हो रहा है, लेकिन लगातार प्रयास जारी हैं।

स्थानीय लोगों और परिवारों की उम्मीदें रेस्क्यू टीम पर टिकी हैं, जबकि प्रशासन ने सभी एजेंसियों को युद्धस्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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