
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध लगातार गंभीर होता जा रहा है और इसी बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिन इस युद्ध के लिए “निर्णायक” साबित हो सकते हैं और ईरान को जल्द से जल्द समझौते की दिशा में कदम उठाना चाहिए, वरना अमेरिका सैन्य कार्रवाई और तेज कर सकता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेगसेथ ने साफ कहा कि अमेरिका युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो “हम बमबारी जारी रखने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका की प्राथमिकता एक समझौता (डील) है, लेकिन इसके लिए ईरान को भी आगे आना होगा। इस बयान को Donald Trump के रुख से जोड़कर देखा जा रहा है, जो लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा मुद्दा तेल सप्लाई और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बन गया है। ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित करने से वैश्विक तेल बाजार पर बड़ा असर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है और इसके प्रभावित होने से कीमतों में तेज उछाल आया है। हेगसेथ ने अपने बयान में साफ कहा कि इस संकट से निपटना सिर्फ अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने अन्य देशों—खासतौर पर ब्रिटेन और फ्रांस—से आगे आने की अपील की और कहा कि उन्हें भी इस समुद्री मार्ग को खोलने में योगदान देना चाहिए। वहीं ट्रंप ने भी अपने सहयोगी देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपनी तेल जरूरतों की सुरक्षा खुद सुनिश्चित करें।

इस बीच युद्ध का असर जमीन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है और ईरानी सेना को बड़ा झटका लगा है। साथ ही, खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हमले और ड्रोन अटैक की घटनाएं भी बढ़ी हैं, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। तेल संकट के कारण वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मची हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। यह स्थिति अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी असर डाल रही है, क्योंकि महंगाई और ईंधन कीमतें बढ़ रही हैं। फिलहाल, स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। एक तरफ अमेरिका ईरान पर दबाव बना रहा है और समझौते की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई भी जारी है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह टकराव शांति वार्ता में बदलता है या और बड़े युद्ध का रूप लेता है।