
वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने के बाद उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। मचाडो ने कहा है कि वे यह पुरस्कार अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को समर्पित करती हैं, खासकर उनके वेनेज़ुएला मामलों में दिए गए समर्थन के लिए। मचाडो ने सोशल मीडिया विशेष रूप से ट्विटर (या X) पर एक पोस्ट के ज़रिए इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि यह पुरस्कार वेनेज़ुएला के लोगों की संघर्ष की मान्यता है और इसे उनके संघर्ष के सम्मान में स्वीकार करती हैं। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस उपलब्धि में ट्रम्प का योगदान उनके लिए अहम रहा। मचाडो ने कहा कि ट्रम्प और संयुक्त राज्य अमेरिका, लैटिन अमेरिका के नागरिक और अन्य लोकतांत्रिक देश उनके मुख्य सहयोगी हैं।
उनका कहना था कि यह सम्मान “सभी वेनेज़ुएलावासियों के संघर्ष की पहचान” है और यह उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देगा। उन्होंने लिखा कि वे वर्तमान समय को “विजय की दहलीज” कहती हैं, और अब पहले से कहीं अधिक आज़ादी और लोकतंत्र की ओर बढ़ने की उम्मीद करती हैं। मचाडो ने साफ किया कि उनका यह पुरस्कार “पीड़ित लोगों और हमारे उद्देश्य के प्रति निर्णायक समर्थन” के प्रति समर्पित है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इसे ट्रम्प को इसलिए समर्पित किया क्योंकि ट्रम्प ने उनके और उनके देश की आवाज़ को वैश्विक मंच पर उठाने में भूमिका निभाई है।

नोबेल समिति की ओर से यह पुरस्कार “लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने, तानाशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण बदलाव की दिशा में संघर्ष करने” की वजह से मचाडो को दिया गया। इस वर्ष इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए कम से कम 338 नामांकन प्राप्त हुए थे, जिनमें 94 संगठन और 244 व्यक्ति शामिल थे। जब इस खबर बाहर आई, तो मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों में भी चर्चा तेज हो गई। कुछ लोग इस बयान को मचाडो की रणनीति कह रहे हैं क्योंकि ट्रम्प और वेनेज़ुएला के बीच राजनीति और विवाद अक्सर रही है। ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की अपेक्षाओं और दावों की बात होती रही है, लेकिन इससे पहले उन्हें यह सम्मान नहीं मिला।

बहरहाल, मचाडो का यह कदम राजनीतिक और मीडिया जगत में बहस का विषय बन गया है। एक ओर यह कहा जा रहा है कि उन्होंने साहस दिखाया अपनी उपलब्धि को उन लोगों को सम्मानित किया, जो उन्हें सहयोग देते रहे। दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि इसे राजनीतिक संकेत के तौर पर लिया जाना चाहिए कि वेनेज़ुएला का संघर्ष अमेरिका और उसके पूर्व नेताओं की भूमिका के बिना अधूरा है।