
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का सबसे दिलचस्प मुकाबला इस बार फिर राघोपुर सीट पर देखने को मिल रहा है। यह वही सीट है जिसे कभी लालू प्रसाद यादव का मजबूत गढ़ माना जाता था, और जहां से उनकी पत्नी राबड़ी देवी तथा बेटे तेजस्वी यादव ने राजनीति की शुरुआत की थी। लेकिन अब इस सीट पर मुकाबला एक बार फिर पुराना है — तेजस्वी यादव बनाम सतीश कुमार।
साल 2010 के विधानसभा चुनाव में राबड़ी देवी को हराकर सतीश कुमार ने राजनीतिक हलकों में बड़ा धमाका किया था। उस जीत के बाद राघोपुर की राजनीति का समीकरण ही बदल गया था। हालांकि बाद के चुनावों में तेजस्वी यादव ने सीट दोबारा राजद (RJD) के खाते में ला दी, लेकिन अब 2025 में सतीश कुमार एक बार फिर मैदान में हैं, और इस बार मुकाबला पहले से कहीं अधिक रोमांचक माना जा रहा है।
सतीश कुमार ने जनता के बीच अपनी विकासवादी छवि बनाकर धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की है। वहीं, तेजस्वी यादव अपनी पिछली सरकार के कामकाज और युवाओं के प्रति वादों के सहारे वोटरों से जुड़ने की कोशिश में हैं।

राघोपुर क्षेत्र में मतदाताओं की चर्चा का केंद्र यही है “क्या इस बार तेजस्वी फिर से जीत पाएंगे या 2010 का इतिहास दोहराया जाएगा?”
गांवों में लोग विकास, सड़क, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं। युवाओं के बीच इस बात की बहस भी जारी है कि “राजद की कथनी और करनी में फर्क क्यों?”
सतीश कुमार का दावा है कि उन्होंने क्षेत्र में “हर घर तक सड़क और पानी” पहुँचाने का काम किया, जबकि तेजस्वी यादव का कहना है कि “राजद का लक्ष्य गरीबों और युवाओं को सशक्त बनाना है।”
अब सवाल यही है — क्या राघोपुर की जनता इस बार “विकास” के नाम पर वोट देगी या “वंशवाद” के नाम पर भावनाओं से प्रभावित होगी?
7 नवंबर को मतदान के बाद इसका फैसला EVM में बंद हो जाएगा, लेकिन इतना तय है कि राघोपुर की लड़ाई बिहार की सबसे चर्चित सीट बनी हुई है।
