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हुमायूं–ओवैसी गठबंधन से बंगाल की सियासत गरम, मुस्लिम वोट बैंक पर बढ़ी जंग

ब्यूरो रिपोर्ट : सिटीजन बी अलर्ट

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के बीच गठबंधन की औपचारिक घोषणा ने राज्य की चुनावी राजनीति को नई दिशा दे दी है।

बुधवार को कोलकाता में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दोनों दलों ने आगामी विधानसभा चुनाव साथ लड़ने का ऐलान किया। AJUP ने 182 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है, जबकि AIMIM को मिलने वाली सीटों पर अभी अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है।


मुस्लिम वोट बैंक पर बढ़ेगी टक्कर

इस गठबंधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हुमायूं–ओवैसी की जोड़ी मुस्लिम वोटरों को अपनी ओर आकर्षित कर पाएगी? पिछले डेढ़ दशक से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को मुस्लिम समुदाय का मजबूत समर्थन मिलता रहा है।

वहीं, कांग्रेस पार्टी और वाम दल भी अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने की कोशिश में हैं। इसके अलावा नौशाद सिद्दीकी की इंडियन सेक्युलर फ्रंट भी मुस्लिम वोटों के समीकरण में सक्रिय है।


सीमावर्ती इलाकों में दिख सकता है असर

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, AIMIM का प्रभाव खासकर बिहार के सीमांचल से सटे बंगाल के जिलों—उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर—के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में AIMIM ने सीमांचल क्षेत्र में 5 सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

ओवैसी ने तृणमूल पर आरोप लगाते हुए कहा कि “मुस्लिमों के वोट तो लिए गए, लेकिन उनके विकास के लिए ठोस काम नहीं हुआ।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह गठबंधन मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ेगा।


मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग ने बढ़ाई बहस

हुमायूं कबीर ने भी बयान देते हुए कहा कि बंगाल को “मुस्लिम मुख्यमंत्री” की जरूरत है। यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है और इससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया है।


क्या BJP को मिलेगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह गठबंधन बड़े पैमाने पर सीटें न जीत पाए, लेकिन मुस्लिम वोटों में विभाजन की संभावना से भारतीय जनता पार्टी को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।


ममता के सामने बढ़ी चुनौती

ममता बनर्जी खुद को मुस्लिम समुदाय की सबसे बड़ी हितैषी बताती रही हैं। इस बार उनकी पार्टी ने 47 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जो पिछली बार से अधिक है।

लेकिन अब उनके सामने चुनौती आसान नहीं दिख रही। राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से लगभग 100–110 सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।


जनसंख्या का समीकरण

पश्चिम बंगाल की कुल आबादी 10 करोड़ से अधिक है, जिसमें करीब 30% मुस्लिम आबादी है। मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी 50% से भी ज्यादा है—जो चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित कर सकती है।

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