
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर “वंदे मातरम्” को लेकर तंज कसा है। मामला उस सरकारी आदेश से जुड़ा है जिसमें राज्य के स्कूलों और मदरसों में “वंदे मातरम्” गाने को लेकर सख्ती की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि यह राष्ट्रगान नहीं बल्कि राष्ट्रगीत है, लेकिन देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा प्रतीक है, इसलिए इसे सभी शिक्षण संस्थानों में गाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर विधानसभा में कहा कि “वंदे मातरम्” देश की आन-बान-शान का प्रतीक है और इसका विरोध करना ठीक नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग सिर्फ राजनीति के लिए ऐसे मुद्दों पर सवाल उठाते हैं। उनके अनुसार, बच्चों में देशभक्ति की भावना जगाने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।
इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंच से तंज कसते हुए कहा कि “योगी जी बताइए, आपके अनरजिस्टर्ड संघी साथियों ने कब वंदे मातरम् गाया था?” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। अखिलेश का कहना है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे भावनात्मक विषयों को आगे कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। इस बयानबाज़ी के बाद भाजपा और सपा नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि “वंदे मातरम्” पर सवाल उठाना राष्ट्रभावना का अपमान है, जबकि सपा का कहना है कि देशभक्ति पर किसी एक दल का अधिकार नहीं है। फिलहाल यह मुद्दा सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि सरकार अपने फैसले पर कितनी सख्ती से अमल कराती है और विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाता है। यूपी की राजनीति में यह विवाद फिलहाल चर्चा का केंद्र बना हुआ है।