
प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का पवित्र दिन माना जाता है। 2025 में यह व्रत हर महीने के त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाएगा। इस दिन भक्त शाम के समय शिवजी की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि प्रदोष काल में किया गया शिव पूजन मनोकामनाएं पूर्ण करता है और जीवन से नकारात्मकता दूर करता है।
क्यों करें शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ?
प्रदोष व्रत के दिन महामृत्युंजय स्तोत्र का पाठ अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि इस स्तोत्र के जप से—
- आयु की वृद्धि होती है
- मानसिक शांति मिलती है
- रोग और संकट दूर होते हैं
- घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है
प्रदोष व्रत में क्या करें?
- सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं
- प्रदोष काल (शाम 4:30 बजे से 7:00 बजे के बीच) पूजा करें
- शिव मृत्युंजय स्तोत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें
- संभव हो तो रुद्राभिषेक कराएं
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा सहज ही प्राप्त होती है। यह व्रत विशेषकर संकट दूर करने, स्वास्थ्य लाभ और पारिवारिक सुख शांति के लिए किया जाता है।
