
इंटीमेट हाइजीन से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो सालों से हमारी आदतों, समाज और विज्ञापनों के कारण हमारे दिमाग में बैठ चुकी हैं। हम इन्हें सच मानते हुए रोज़मर्रा में अपनाते भी रहते हैं, लेकिन ब्रिटेन की एक जानी-मानी डॉक्टर ने इन मिथकों के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए बताया कि इनमें से कई बातें पूरी तरह झूठ हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य और आत्मविश्वास दोनों को नुकसान पहुँचाने में ये मिथक बड़ी भूमिका निभाते हैं। आइए जानते हैं वो चार बातें जो अक्सर सच मानी जाती हैं, लेकिन असल में मिथक हैं।
- “वजाइना को खुशबूदार रखने के लिए परफ्यूम्ड वॉश ज़रूरी है”— पूरी तरह झूठ
डॉक्टर के अनुसार, किसी भी तरह के खुशबूदार वॉश, स्प्रे या सुगंधित प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना ज़रूरी नहीं बल्कि नुकसानदेह है। विज्ञापन भले ही इन्हें “फ्रेशनेस” का नाम दें, लेकिन असल में ये उत्पाद प्राकृतिक पीएच बैलेंस को बिगाड़ देते हैं और खुजली, जलन, संक्रमण जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
वजाइना खुद को प्राकृतिक रूप से साफ़ और स्वस्थ रखने की क्षमता रखती है; इसे केमिकल्स की ज़रूरत नहीं होती।
- “पीरियड्स के दौरान ज्यादा बार धोना जरूरी है”— गलतफहमी
पीरियड्स में स्वच्छता रखना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दिन में कई बार इंटीमेट ऐरिया को बार-बार धोया जाए। डॉक्टर के अनुसार, बहुत ज्यादा धुलाई से प्राकृतिक बैक्टीरिया खत्म होते हैं और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
साफ़ नहाना और सैनिटरी प्रोडक्ट बदलते रहना पर्याप्त है।
- “हर रोज़ इंटीमेट वॉश का इस्तेमाल करना हेल्दी है”— अपनाया गया लेकिन गलत ट्रेंड
कई महिलाएँ मानती हैं कि जैसे फेस वॉश रोज़ इस्तेमाल किया जाता है, वैसे ही इंटीमेट वॉश भी ज़रूरी है। लेकिन डॉक्टर की राय में, यह एक मार्केटिंग मिथ है।
वजाइना को केवल हल्के गुनगुने पानी से बाहर की सतह (वुल्वा) की सफाई की जरूरत होती है।
रोज़ाना वॉश का इस्तेमाल उल्टा जलन और dryness बढ़ा सकता है।

- “वजाइना की स्मेल मतलब इंफेक्शन”— ये भी पूरी सच्चाई नहीं
डॉक्टर बताती हैं कि हर महिला के शरीर की अपनी एक प्राकृतिक गंध होती है, जो बिल्कुल सामान्य है।
स्मेल का मतलब हर बार इंफेक्शन नहीं होता। केवल तब ध्यान देने की जरूरत होती है जब गंध बहुत तेज़, असामान्य या मछली जैसी हो और उसके साथ खुजली, जलन या डिस्चार्ज हो।
प्राकृतिक स्मेल को छिपाने के लिए स्प्रे, डियो या पाउडर लगाने की जरूरत नहीं है।
डॉक्टर का संदेश: “अपने शरीर को समझें, विज्ञापन नहीं”
अंत में ब्रिटिश डॉक्टर ने साफ़ कहा कि महिलाओं को अपने शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली पर भरोसा करना चाहिए।
मार्केटिंग के असर में आकर केमिकल प्रोडक्ट्स का प्रयोग करने से नुकसान ज्यादा और फायदे कम होते हैं।
इंटीमेट हाइजीन का असली मतलब है
