
अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। लगभग चार साल बाद पहली बार तेल की कीमतें इतनी ऊंचाई पर पहुंची हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मध्य-पूर्व में जारी युद्ध से तेल उत्पादन और सप्लाई को लेकर बड़ी चिंता पैदा हो गई है। कई जगहों पर तेल से जुड़ी सुविधाओं और परिवहन मार्गों पर खतरा बढ़ गया है। इसी वजह से बाजार में तेल की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई और कुछ समय के लिए यह 107 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा हो गई।
तेल की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पैदा हुआ संकट भी है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। युद्ध और हमलों के डर से इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे सप्लाई कम होने की आशंका बढ़ गई है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर शेयर बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कई एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई है और निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है कि महंगाई फिर से बढ़ सकती है।

अगर यह युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ जाएगा और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा। खास तौर पर वे देश ज्यादा प्रभावित होंगे जो तेल आयात पर निर्भर हैं। उदाहरण के लिए पाकिस्तान जैसे देशों का तेल आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है, जिससे वहां आर्थिक संकट गहरा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में शांति नहीं होने तक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। अगर तेल सप्लाई प्रभावित होती रही तो आने वाले समय में वैश्विक महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की संभावना है।