
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक बेहद हाई-रिस्क सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देते हुए अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने अपने फाइटर जेट के क्रैश होने के बाद फंसे एयरफोर्स अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह रेस्क्यू मिशन हाल के समय के सबसे साहसिक ऑपरेशनों में से एक माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना का F-15E फाइटर जेट 3 अप्रैल 2026 को ईरान के अंदर मार गिराया गया था। इस विमान में दो क्रू मेंबर थे—एक पायलट और दूसरा वेपन सिस्टम्स ऑफिसर। पायलट को घटना के कुछ ही घंटों बाद सुरक्षित निकाल लिया गया था, लेकिन दूसरा अधिकारी ईरान के अंदर ही फंस गया था, जिससे हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे।
इसके बाद अमेरिका ने एक बड़े स्तर का “कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन” शुरू किया, जो करीब 36 घंटे तक चला। इस दौरान अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन कमांडो, हेलीकॉप्टर, फाइटर जेट और एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) भी उस अधिकारी को पकड़ने की कोशिश में थी, जिससे मिशन और ज्यादा खतरनाक हो गया था। आखिरकार 5 अप्रैल की सुबह अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने दुश्मन के इलाके में घुसकर उस अधिकारी को सुरक्षित निकाल लिया। इस ऑपरेशन के दौरान कई बार सीधे टकराव की स्थिति भी बनी, लेकिन अमेरिकी टीम ने मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और सभी जवान सुरक्षित बाहर निकल आए।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस मिशन को “अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक” बताया। उन्होंने कहा कि घायल अधिकारी अब सुरक्षित है और जल्द ही ठीक हो जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि यह घटना चल रहे करीब पांच हफ्तों के युद्ध के दौरान हुई, जिसमें अब तक कई अमेरिकी सैनिकों की मौत और सैकड़ों घायल हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन अमेरिकी सेना की क्षमता और तकनीकी ताकत को दिखाता है, लेकिन साथ ही यह भी संकेत देता है कि ईरान के खिलाफ युद्ध अभी और लंबा खिंच सकता है।