
वैशाख माह की विकट संकष्टी चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे संकटों को दूर करने वाला माना जाता है। साल 2026 में विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल को सुबह 11:59 बजे शुरू होगी और 6 अप्रैल को दोपहर 2:10 बजे समाप्त होगी। इस व्रत की खास बात यह है कि इसका पालन चंद्रोदय के आधार पर किया जाता है, इसलिए 5 अप्रैल को ही व्रत रखा जाएगा।
विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी, जिसमें पूजा के लिए सुबह 07:41 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा शाम के समय 06:20 बजे से 08:06 बजे तक भी पूजा करना लाभकारी माना गया है। इस दिन भद्रा काल भी रहेगा, जो सुबह 06:07 बजे से 11:59 बजे तक रहेगा, लेकिन चूंकि भद्रा का वास पाताल लोक में है, इसलिए इसका प्रभाव पूजा-पाठ पर नहीं पड़ेगा और श्रद्धालु बिना किसी चिंता के पूजा कर सकते हैं। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान कर भगवान गणेश का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हैं। शाम के समय विधि-विधान से गणेश जी की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान उन्हें दूर्वा, मोदक, लड्डू और फूल अर्पित किए जाते हैं। साथ ही गणेश मंत्रों का जाप और व्रत कथा का पाठ भी किया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से मानसिक शांति, सफलता और बाधाओं से मुक्ति के लिए किया जाता है। इस प्रकार विकट संकष्टी चतुर्थी न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दिन चंद्रमा के दर्शन का भी विशेष महत्व होता है।