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पश्चिम एशिया संकट: अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती, भारत पर क्या होगा असर?

ब्यूरो रिपोर्ट :सिटीजन बी अलर्ट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव भारत के लिए ‘तिहरा खतरा’ पैदा कर सकता है। एएसके वेल्थ एडवाइजर्स की नवीनतम रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि खाड़ी देशों में संकट और गहराता है तो भारत को ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, रेमिटेंस की आवक में गिरावट और रिवर्स माइग्रेशन (श्रमिकों की वापसी) का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति घरेलू अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाल सकती है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खाड़ी देशों पर निर्भरता केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रम बाजार और वित्तीय प्रवाह से भी गहराई से जुड़ी है। भारत दुनिया में रेमिटेंस का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता है, जहां 2023 में 120 अरब डॉलर से अधिक की आवक हुई। इसका लगभग आधा हिस्सा अकेले खाड़ी सहयोग परिषद देशों से आता है, जिसमें यूएई सबसे बड़ा स्त्रोत है।
खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीय श्रमिक
खाड़ी देशों में लगभग 80 से 90 लाख भारतीय श्रमिक कार्यरत हैं। अकेले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में ही लगभग 35 लाख भारतीय हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों के लिए खाड़ी रोजगार आर्थिक गतिशीलता का मुख्य आधार रहा है। वहां से आने वाले वेतन ने स्थानीय संपत्ति बाजारों, शिक्षा और सामाजिक बीमा को वित्तपोषित किया है।
कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों की अचानक वापसी से घरेलू श्रम बाजार पर बोझ बढ़ेगा, जिसे संभालना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, दुबई भारतीय व्यवसायों के लिए एक प्रमुख वित्तीय केंद्र है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि यूएई में विश्वास की कमी आती है तो यह न केवल भारतीय श्रमिकों को प्रभावित करेगा, बल्कि इसका सीधा असर भारतीय निजी पूंजी और विदेशी वित्तीय ढांचे पर भी पड़ेगा।

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