
गुजरात में बढ़ती भीषण गर्मी और ‘लू’ (हीटवेव) के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। राज्य के प्रमुख शहरों—राजकोट, अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा—के सरकारी अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि लू से प्रभावित मरीजों को तुरंत और प्रभावी उपचार मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग ने सिविल अस्पतालों में 70 से अधिक बेड वाले स्पेशल हीट स्ट्रोक वार्ड तैयार किए हैं। इन वार्डों में मरीजों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में तेजी से इलाज संभव हो सके।
शहरों में विशेष व्यवस्थाएं
सूरत:
सूरत के SMIMER अस्पताल में विशेष वार्ड के साथ इमरजेंसी विभाग में बर्फ के बिस्तर (Ice Beds) और बाथटब की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य मरीज के शरीर का तापमान तेजी से कम करना है, जो हीट स्ट्रोक के इलाज में बेहद जरूरी होता है।
वडोदरा:
SSG अस्पताल में हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए 30 से अधिक बेड का अलग वार्ड तैयार किया गया है। यहां ICU और वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, ताकि गंभीर मरीजों को तुरंत राहत मिल सके।
राजकोट और अहमदाबाद:
दोनों शहरों के सिविल अस्पतालों में स्पेशल हीट स्ट्रोक वार्ड शुरू कर दिए गए हैं, जहां प्रशिक्षित मेडिकल टीम लगातार निगरानी कर रही है।
लू लगने के प्रमुख लक्षण
- शरीर का तापमान 105-106°F तक पहुंच जाना
- चक्कर आना और तेज सिरदर्द
- बेहोशी या भ्रम की स्थिति
- उल्टी या मतली (Nausea)
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है:
- दोपहर में बाहर निकलने से बचें: सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक धूप में जाने से परहेज करें।
- पर्याप्त पानी पिएं: प्यास न लगे तब भी पानी, नारियल पानी, छाछ, शिकंजी या ORS का सेवन करें।
- सही कपड़े पहनें: हल्के रंग के, ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें।
- धूप से बचाव करें: बाहर निकलते समय सिर ढकें और छाते का उपयोग करें।
- वाहनों में सावधानी रखें: खड़ी कार में बच्चों या पालतू जानवरों को कभी न छोड़ें।
आपात स्थिति में क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति में लू के गंभीर लक्षण दिखें या वह बेहोश हो जाए, तो तुरंत उसे छांव में लाएं। उसके शरीर को ठंडे पानी से पोछें और बिना देर किए नजदीकी सरकारी अस्पताल के स्पेशल वार्ड में पहुंचाएं।
गुजरात में बढ़ती गर्मी को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की यह तैयारी राहत देने वाली है, लेकिन सबसे जरूरी है लोगों की जागरूकता और सावधानी। क्योंकि लू से बचाव ही सबसे प्रभावी इलाज है।