
वड़ोदरा : सरकारी अस्पतालों को ‘गरीबों का मसीहा’ माना जाता है, जहाँ लोग उम्मीद के साथ इलाज कराने पहुँचते हैं। लेकिन वड़ोदरा के सबसे प्रतिष्ठित GMERS मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (गोत्री अस्पताल) में एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जो किसी की जान ले सकती थी। यहाँ नर्सिंग स्टाफ की भारी चूक के कारण एक मरीज को दूसरे मरीज के ब्लड ग्रुप की बोतल चढ़ा दी गई।
क्या है पूरा मामला?
अस्पताल में दो मरीज उपचाराधीन थे, जिन्हें खून की जरूरत थी। इत्तेफ़ाक से दोनों के नाम मिलते-जुलते थे। जब ब्लड बैंक से खून की बोतलें मंगवाई गईं, तो ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने बिना पूरी जांच किए मरीज ‘A’ का खून मरीज ‘B’ को चढ़ाना शुरू कर दिया।
जैसे ही स्टाफ को अपनी इस जानलेवा गलती का एहसास हुआ, तुरंत खून चढ़ाना बंद किया गया और मरीज को तत्काल इमरजेंसी उपचार (जैसे इंसुलिन और अन्य सुरक्षात्मक उपाय) दिए गए ताकि शरीर में रिएक्शन न हो।
अस्पताल प्रशासन की सफाई और कार्रवाई
इस घटना के बाद अस्पताल में तनाव का माहौल बन गया। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए RMO (रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर) डॉ. कटलाणा ने बयान जारी किया है:
गंभीर लापरवाही स्वीकार की: RMO ने माना कि नाम की समानता के कारण नर्सिंग स्टाफ से यह बड़ी चूक हुई है।
नोटिस जारी: संबंधित नर्सिंग स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है।
टर्मिनेशन की चेतावनी: प्रशासन ने साफ किया है कि जांच के आधार पर दोषी स्टाफ को नौकरी से निकालने (Terminate) तक की सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीज की स्थिति: गनीमत रही कि समय रहते गलती पकड़ में आ गई। फिलहाल मरीज खतरे से बाहर है और उसे प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
उठते बड़े सवाल?
यह घटना अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़ा करती है:
अगर मरीज को रिएक्शन हो जाता और उसकी जान चली जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?
क्या ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाने) से पहले ‘डबल-चेक’ की मानक प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया गया?
गोत्री अस्पताल में बार-बार सामने आने वाली ऐसी लापरवाहियों पर स्थायी रोक कब लगेगी?